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Coronavirus: कोरोना से ठीक होने के बाद भी क्यों बीमार पड़ रहे हैं लोग? जानिए क्या कहते हैं विशेषज्ञ

Mon, 31 Aug 2020 02:37 PM IST
सोनू शर्मा लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay/Amarujala
हरियाणा में गुरुग्राम के रहने वाले भरत जुनेजा को मई में पता चला कि वो कोविड पॉजिटिव हैं। उनके लक्षण गंभीर थे इसलिए उन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। कई दिनों के इलाज के बाद वो पूरी तरह ठीक हो गए। इसके बाद भी उन्हें थकान, कमजोरी, सांस फूलना और ठीक से नींद ना आने जैसे समस्याएं होने लगीं। 51 साल के भरत जुनेजा बताते हैं, 'मुझे करीब सात दिनों तक वेंटिलेटर पर रहना पड़ा था। इसके बाद 16 जून को मेरी रिपोर्ट निगेटिव आ गई और दो दिन बाद मैं डिस्चार्ज हो गया, लेकिन इसके बाद भी मुझे थकान और कमजोरी महसूस होने लगी और चक्कर आने लगे।' 

भरत ने बताया, ' मुझे सीढ़ियां चढ़ने में परेशानी होने लगी थी और जल्दी गुस्सा आने लगा था। मुझे वेंटिलेटर पर कई दिनों तक रहने के चलते भी डरावने सपने आ रहे थे। डॉक्टर ने बताया कि ये प्रक्रिया का हिस्सा है। ये ठीक हो जाएगा।' पेशे से इंजीनियर भरत जुनेजा का फोर्टिस अस्पताल में इलाज चल रहा है और अब वो बेहतर महसूस कर रहे हैं। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
कोरोना वायरस से ठीक होने के बाद भी कई लोग बीमार पड़ रहे हैं। उनमें सांस लेने में परेशानी, चक्कर आना, थकान, हल्का बुखार, जोड़ों में दर्द और उदासी जैसे लक्षण सामने आ रहे हैं। इसे पोस्ट कोविड सिम्पटम भी कहा जाता है। भारत ही नहीं, विदेशों में भी लोगों ने सोशल मीडिया या सर्वे के जरिए अपने अनुभव बताए हैं। हाल ही में गृह मंत्री अमित शाह की कोविड-19 रिपोर्ट निगेटिव आने के तीन दिनों बाद उन्हें फिर से अस्पताल में भर्ती करना पड़ा था। उन्हें चक्कर आने और बदन दर्द की शिकायत थी। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
दिल्ली के राजीव गांधी सुपर स्पेशिएलिटी हॉस्पिटल में इसी महीने पोस्ट-कोविड क्लीनिक भी बनाया गया है, जहां कोविड से ठीक होने के बाद भी परेशानी महसूस कर रहे मरीजों का इलाज होता है। डॉक्टरों के मुताबिक, ऐसे कई मरीज सामने आ रहे हैं, जिनमें कोरोना वायरस की रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद भी लक्षण बने हुए हैं और उन्हें इलाज की जरूरत पड़ रही है। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
पोस्ट कोविड लक्षण क्या हैं?

मैक्स अस्पताल, वैशाली में पल्मनॉलॉजी के प्रिंसिपल कंसल्टेंट डॉ. शरद जोशी कहते हैं, 'कोविड-19 से ठीक होने के बाद हमारे पास कई मरीज आ रहे हैं। उन्हें थकान, सांस लेने में परेशानी, चक्कर आना और बेहोशी जैसे समस्याएं हो रही हैं। कई लोगों में स्वाद का ना आना और गले में खराश की दिक्कत भी बनी रहती है।' 

जिस मरीज में कोविड का संक्रमण जितना अधिक होता है, उतने ज्यादा लक्षण उसमें ठीक होने के बाद देखने को मिलते हैं। हालांकि, कोविड के हल्के-फुल्के संक्रमण वाले लोगों को भी बाद में कमजोरी महसूस हो रही है। कई मरीजों में ये कमजोरी इतनी ज्यादा हो सकती है कि बेड से उठकर बाथरूम जाने में भी मुश्किल होने लगे। डॉक्टरों के मुताबिक, जरूरी नहीं कि ये लक्षण हर मरीज में सामने आएं। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
डॉ. शरद जोशी के अनुसार, जितने भी गंभीर लक्षण वाले मरीज उनके पास आ रहे हैं, उनमें से 30 से 35 प्रतिशत मरीजों में ठीक होने के बाद ये समस्या आ रही है। 30 प्रतिशत हल्के-फुल्के संक्रमण वाले मरीजों में कमजोरी आ रही है। कुछ मरीज ऐसे हैं, जिनके एक्सरे में अच्छा सुधार दिखता है, लेकिन पल्मनरी फंक्शन टेस्ट करने पर पता चलता है कि उनके फेफड़ों की कार्यक्षमता में 50 प्रतिशत तक की कमी आई है। 

ब्रिटेन के नॉर्थ ब्रिस्टल एनएचएस ट्रस्ट के एक अध्ययन के मुताबिक, डिस्चार्ज हुए 110 मरीजों में से 81 को सांस लेने में दिक्कत, बार-बार बेहोशी और जोड़ों में दर्द की परेशानी हुई है। ऐसे मरीज कम थे, जिनमें फेफड़ों की गंभीर समस्या हो या उनकी कार्यक्षमता में कमी आई हो। ये रिसर्च के प्राथमिक नतीजे हैं। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
पल्मोनरी फाइब्रोसिस

कोविड-19 के मरीजों में एक बड़ी समस्या पल्मनरी फाइब्रोसिस को लेकर आ रही है, जो फेफड़ों से जुड़ी है। डॉ. शरद जोशी बताते हैं, 'जिन लोगों में कोविड-19 के संक्रमण के कारण एक्यूट रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम (एआरडीएस) हो जाता है यानी फेफड़े ठीक से काम नहीं करते, उनमें पल्मनरी फाइब्रोसिस की समस्या हो सकती है। पल्मनरी फाइब्रोसिस में फेफड़ों की ऑक्सीजन लेने की क्षमता कम हो जाती है। ऐसे मरीजों को सांस फूलने की परेशानी लंबे समय तक रह सकती है। ज्यादा गंभीर स्थिति में घर में ऑक्सीजन भी लेनी पड़ सकती है।' 

'कोविड-19 के जिन मरीजों में एआरडीएस देखा गया है, उनमें से एक प्रतिशत में जिंदगीभर फेफड़ों संबंधी परेशानी रह सकती है। उनके फेफड़े कमजोर हो जाते हैं और आगे भी किसी अन्य संक्रमण की चपेट में आ सकते हैं। इन्हें लंबे समय के लिए अपना इलाज कराना पड़ेगा।' 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
डॉक्टर कहते हैं कि पल्मनरी फाइब्रोसिस में बहुत अच्छी प्रतिक्रिया नहीं है। दूसरे वायरस जैसे सार्स या एच1एन1 में ठीक होने के बाद भी पल्मनरी फाइब्रोसिस होना इतना सामान्य और विस्तृत नहीं था। कोविड-19 में ऐसे दोगुने मामले मिल रहे हैं। 

इसके अलावा कोरोना वायरस ठीक होने के बाद मरीज के न्यूरो सिस्टम पर भी असर पड़ता है। फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट, गुरुग्राम में न्यूरोलॉजी के प्रमुख डॉ. प्रवीण गुप्ता कहते हैं, 'कोविड-19 से ठीक होने के बाद नसों में लकवा हो सकता है, कभी-कभी ये दिमाग पर भी असर करता है, जिससे याददाश्त प्रभावित होती है। कोविड में आइसोलेशन के बाद घबराहट हो सकती है। इसे पोस्ट डिजीज स्ट्रेस डिसऑर्डर कहते हैं। जिन मरीजों में दिमाग में सूजन या फेफड़ों की गंभीर समस्या होती है, उनमें बाद में ज्यादा लक्षण देखने को मिलते हैं वरना कमजोरी और चक्कर आना सबसे सामान्य लक्षण हैं।' 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
बीमारी ठीक होने पर भी लक्षण क्यों?

डॉक्टरों के मुताबिक, ऐसा होना कोई नई बात नहीं है। ऐसा दूसरे वायरस के मामलों में भी होता है। इसके कारण को लेकर डॉ. शरद जोशी ने बताया, 'वायरस से लड़ने के लिए शरीर में बने एंटीजन इम्यून सिस्टम में इस तरह के बदलाव कर देते हैं, जिससे इम्यून सिस्टम अति प्रतिक्रिया करने लगता है। इसी कारण बुखार, बदन दर्द और अन्य समस्याएं होने लगती हैं। शरीर में इनफ्लेमेट्री रिएक्शन होने लगता है जो पूरे शरीर पर प्रभाव डालता है। ऐसे में वायरस खत्म होने के बाद भी इनफ्लेमेट्री सेल्स और केमिकल बने रहते हैं। इम्यून सिस्टम की इस प्रतिक्रिया के कारण ही लक्षण बने रहते हैं।' 

वो कहते हैं, 'जैसे चिकनगुनिया में 8 से 10 दिन बुखार रहने के बाद ठीक हो जाता है, लेकिन उसके कई मरीजों को जोड़ों में दर्द और शरीर में दर्द कई महीनों तक रहता है। कई मरीजों को गठिया की बीमारी भी हो जाती है।' लेकिन, कुछ मामलों को छोड़ दें तो ये लक्षण हमेशा के लिए धीरे-धीरे ठीक भी हो जाते हैं। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
डॉक्टर प्रवीण गुप्ता बताते हैं कि शरीर की प्रकृति होती है धीरे-धीरे मरम्मत करना। इसलिए कुछ समस्याएं बेहोशी और चक्कर आना धीरे-धीरे अपनेआप ठीक हो सकते हैं, लेकिन कमजोरी, सांस लेने में दिक्कत या लकवे आदि की स्थिति में दवा की जरूरत होती है। कोरोना वायरस ठीक होने के बाद के लक्षण ठीक होने में हफ्तों से लेकर दो से छह महीने भी लग सकते हैं। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
कोरोना से ठीक होने के बाद बरतें ये सावधानियां

कोरोना वायरस ठीक होने जाने के बाद किसी व्यक्ति में 30 से 40 दिनों तक एंटीबॉडी बनी रहती है। ऐसे में उसके कोरोना से संक्रमित होने का खतरा बहुत कम हो जाता है। फिर भी डॉक्टर पूरी तरह सावधानियां बरतने की सलाह देते हैं। डॉक्टर शरद जोशी का कहना है कि आपका शरीर एक वायरस से लड़कर जीता है। आपके इम्यून सिस्टम पर पहले से ही दबाव था। ऐसे में अपने खाने-पीने का ध्यान रखें। 

मास्क, हाइजीन और सोशल डिस्टेंसिंग को लेकर सावधानियाँ बरतें। ऐसा ना करने पर हो सकता है कि आपको कोई और इंफेक्शन हो जाए और पहले से कमजोर शरीर पर उसका गंभीर असर हो जाए। अगर कोविड ठीक होने के बाद कोई भी समस्या हो रही है, तो डॉक्टर को अवश्य दिखाएं। 
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