प्रतीकात्मक तस्वीर
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हम कैसे इसका पता लगा सकते हैं?
वेट बल्ब ग्लोब टम्परेचर (डब्लूबीजीटी) एक ऐसा सिस्टम है जिससे हमें ना सिर्फ गर्मी का अंदाजा लगता है बल्कि यह आद्रता और दूसरे तथ्यों के सहारे हमें वातावरण की वास्तविक स्थिति के बारे में बताता है। 1950 के दशक में अमेरिकी फौज इसका इस्तेमाल अपने सैनिकों को सुरक्षित रखने में करती थी।
उदाहरण के लिए जब डब्लूबीजीटी 29 डिग्री सेल्सियस पर पहुंचे तो किसी को भी यह सलाह दी जाती है कि वो व्यायाम रोक दे, लेकिन डॉ ली और उनके साथी लगातार सिंगापुर के एनजी टेंग फोंग अस्पताल में इस तापमान पर काम कर रहे हैं। डब्लूबीजीटी के स्केल पर जब 32 डिग्री सेल्सियस पहुंच जाए तो सलाह दी जाती है कि कठोर शारीरिक गतिविधियां रोक देनी चाहिए, क्योंकि उस वक्त खतरा अपने 'चरम' पर पहुंच गया होता है। लेकिन हाल ही में श्री रामाचंद्रा यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर विद्या वेणुगोपाल ने डब्लूबीजीटी पर यह स्तर चेन्नई के अस्पतालों में दर्ज किया है।
इसके अलावा उन्होंने साल्ट पैन की फैक्ट्री में डब्लूबीजीटी पर 33 डिग्री तापमान पाया तो वहीं स्टील फैक्ट्री में 41.7 डिग्री सेल्सियस पाया। वो कहती हैं, 'अगर यह हालत हर रोज रहती है तो फिर लोगों को डिहाइड्रेशन, दिल की बीमारी, किडनी में पत्थर और गर्मी लगने जैसी समस्याएं पैदा होंगी।'