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Coronavirus: कोरोना से बचने के लिए मास्क जरूरी, लेकिन ये खतरा भी बन रहे, जानिए कैसे

Mon, 14 Sep 2020 01:45 PM IST
सोनू शर्मा लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
कोरोना वायरस के महामारी बनने के साथ ही विश्व स्वास्थ्य संगठन ने सोशल डिस्टेंसिंग के साथ ही मास्क पहनने को जरूरी बताया था। कोरोना वायरस से सुरक्षा के लिए ज्यादातर देशों में सार्वजनिक स्थलों पर मास्क पहनना अनिवार्य कर दिया गया है, लेकिन अब इन मास्क की ही वजह से प्रदूषण का खतरा भी बढ़ गया है। कई देशों की सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे डिस्पोजेबल मास्क की जगह ज्यादा से ज्यादा री-यूजेबल मास्क का इस्तेमाल करें। ब्रिटेन के लिबरल डेमोक्रेट्स का कहना है कि सिंगल यूज सर्जिकल मास्क के कारण भारी मात्रा में 'प्लास्टिक-वेस्ट' पैदा हो रहा है जो पर्यावरण के लिहाज से खतरनाक है और ऐसे में हमें उन विकल्पों को तलाशने की जरूरत है जो पर्यावरण के अनुकूल हों।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
डिस्पोजेबल मास्क में प्लास्टिक होता है जो जल प्रदूषण को बढ़ाता है और साथ ही वन्यजीवन को भी नुकसान पहुंचा सकता है। कई बार लोग मास्क को इस्तेमाल के बाद इधर-उधर फेंक देते हैं और जीव-जन्तु इसे खा लेते हैं, जोकि चिंता की बात है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
ब्रिटेन की सरकार का कहना है कि इस बात की पड़ताल की जा रही थी कि क्या पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट (पीपीई) को दोबारा से इस्तेमाल किया जा सकता है। कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए सार्वजनिक जगहों पर और परिवहन में चेहरा ढकना (डिस्पोजेबल या री-यूजेबल) अनिवार्य कर दिया गया है। इसके अलावा खरीदारी के दौरान दुकान, कॉलेज और स्कूल आदि जगहों पर भी मास्क पहनने के निर्देश जारी किए गए हैं। ज्यादातर देशों में मास्क पहनने को लेकर सख्ती बरती जा रही है।  

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
क्या है खतरा

सर्जिकल डिस्पोजेबल मास्क में आमतौर पर प्लास्टिक होता है। इस तरह के मास्क बनाने के लिए पॉलीप्रॉपलीन का इस्तेमाल किया जाता है। लोगों को सलाह दी जा रही है कि अगर वे सर्जिकल मास्क का इस्तेमाल कर रहे हैं तो उसे डिस्पोज करते समय या काले बैग में डालकर कूड़ेदान में फेकें या फिर लिटर बिन (सूखे कचड़े के लिए कूड़ेदान) में ही इसे डिस्पोज ऑफ करें। लोगों को सलाह दी गई है कि वे इन सर्जिकल मास्क को री-साइकिल-बिन में नहीं डालें, क्योंकि इन्हें पारंपरिक री-साइकिल सुविधाओं से री-साइकिल नहीं किया जा सकता है। साथ ही अगर आपको अगर घर के बाहर रहते हुए लिटर-बिन न मिले तो इसे घर लेकर जाएं और ब्लैक बैग में डालकर कूड़ेदान में डालें। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
एक ओर जहां मानव स्वास्थ्य को देखते हुए लोगों से मास्क पहनकर रखने का अनुरोध किया गया है, वहीं पर्यावरण संरक्षण के लिए काम करने वाले कार्यकर्ताओं का कहना है कि सैकड़ों, हजारों यहां तक की लाखों डिकंपोज्ड मास्क सड़कों पर बिखरे पड़े हैं। समुद्र किनारे भी सैकड़ों की संख्या में फेंके मास्क मिले हैं। समुद्र तटों को साफ रखने के लिए ब्रिटेन में तो बकायदा कैंपेन का भी आयोजन किया जा रहा है। इस आयोजन का नेतृत्व करने वाली संस्थान क्लीन-सीज की प्रमुख लौरा फॉस्टर का कहना है कि नदियों को देखिए। आपको नदियों में बहते मास्क दिख जाएंगे।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
लौरा फॉस्टर कहती हैं, 'कई बार ये मास्क आपस में इतने उलझ जाते हैं कि जाल जैसे हो जाते हैं और जीव-जन्तु इसमें फंस जाते हैं। कई बार ये आग लगने का कारण भी बनते हैं। इन्हें बायोडिग्रेड नहीं किया जा सकता है, लेकिन ये टुकड़ों-टुकड़ों में बिखर सकते हैं। ऐसे में समुद्र में माइक्रोप्लास्टिक और बढ़ जाता है। समुद्र में प्लास्टिक के बढ़ने का सीधा असर फूड चेन पर पड़ेगा।' लोगों से अनुरोध किया जा रहा है कि जब वे अपने डिस्पोजेबल मास्क फेंके तो उनमें लगी स्ट्रिप को निकाल दें ताकि जीव-जन्तु उसमें फंसे नहीं। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
क्लाइमेट एंड बिजनेस की प्रवक्ता साराह ओलने ने बताया, 'मौजूदा समय में हम कोविड19 महामारी के खतरों से जूझ रहे हैं। हम सभी अपनी तरफ से एक-दूसरे को सुरक्षित रखने की पूरी कोशिश कर रहे हैं और मास्क पहनकर रखना इसका एक हिस्सा है, लेकिन यह धरती को नुकसान पहुंचाने की कीमत पर नहीं होना चाहिए।' वो कहती हैं, 'यह बहुत स्पष्ट है कि सिंगल यूज मास्क से बेपनाह कचड़ा पैदा हो रहा है। सिंगल यूज मास्क के बजाय लोगों को री-यूजेबल मास्क इस्तेमाल करना चाहिए ताकि पर्यावरण को भी खतरा नहीं पहुंचे।' 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : PTI
भारत में कितनी गंभीर है ये समस्या

खुले में फेंके जा रहे दस्ताने, मास्क या पीपीई किट को लेकर भारत में भी चिंता जताई गई है। डाउन टू अर्थ वेबसाइट के मुताबिक, जुलाई महीने में सुप्रीम कोर्ट ने अस्पतालों को नोटिस जारी करने का निर्देश देते हुए कहा था कि यह सुनिश्चित किया जाए कि बायो मेडिकल वेस्ट खुले में न डंप हो। यह आदेश कोरोना काल में दिल्ली में बढ़े बायोमेडिकल वेस्ट को देखते हुए दिया गया था। 
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