प्रतीकात्मक तस्वीर
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देखने से ऐसा लग रहा है कि महामारी का प्रभाव कम हो रहा है, लेकिन कई जानकारों का मानना कि इन संख्याओं को एहतियात के साथ पढ़ना चाहिए। उनका मानना है संख्या में कमी आना एक सकारात्मक सिग्नल है, लेकिन ये कहना महामारी खत्म हो रही है, जल्दबाजी होगी, क्योंकि सिर्फ टेस्ट का बढ़ना और मामलों का गिरना ही किसी महामारी को समझने के लिए काफी नहीं है। हर दिन होने वाले कुल टेस्ट में से आधे रैपिड एंटीजेन तकनीक से किए जा रहे हैं। इससे नतीजे जल्दी आ रहे है, ये तकनीक किफायती भी है, लेकिन कई मामलों में ये सटीक नतीजे नहीं देती, कई बार 50 प्रतिशत तक नतीजे गलत होते हैं।