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Bill Gates: दुनिया के सबसे अमीर व्यक्तियों में शुमार बिल गेट्स इस समस्या का हैं शिकार, बेटी ने किया खुलासा

Fri, 02 May 2025 05:26 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

अमेरिकन बिजनेसमैन बिल गेट्स एस्परगर सिंड्रोम नाम की एक समस्या से पीड़ित है। बिल गेट्स की बेटी फोबे गेट्स ने एक पॉडकास्ट में खुलासा किया है। आइए बिल गेट्स की इस बीमारी के बारे में विस्तार से समझते हैं।
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बिल गेट्स एस्परगर सिंड्रोम से पीड़ित - फोटो : Bill Gates/Instagram
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विस्तार
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Bill Gates Aspergers Syndrome: दुनिया के सबसे अमीर व्यक्तियों में शुमार अमेरिकन बिजनेसमैन बिल गेट्स 'एस्परगर सिंड्रोम' नाम की एक समस्या से पीड़ित हैं। बिल गेट्स की बेटी फोबे गेट्स ने एक पॉडकास्ट में इसका खुलासा किया है। उन्होंने कहा, मेरे पिता को एस्परगर सिंड्रोम की समस्या है, कई बार ये स्थिति हम सबके लिए अजीबो-गरीब हो जाती है। पॉडकास्ट में फोबे ने एक मामले के जिक्र करते हुए कहा, जब वह अपने बॉयफ्रेंड को घर लेकर आईं तो उनके लिए अपने पिता से मिलना कितना “भयानक” था। 

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फोबे कहती हैं, मेरे पिता से मिलना उस लड़के के लिए बहुत भयानक था हालांकि मेरे लिए, यह हास्यास्पद था क्योंकि मेरे पिता सामाजिक रूप से काफी अजीब हैं। एस्परगर सिंड्रोम के कारण उन्हें  दूसरों के साथ बातचीत करने में कई बार कठिनाई होती है, रिपिटेटिव बिहेवियर के कारण कई बार आसान चीजें भी कठिन हो जाती हैं।
 

पॉडकास्ट में हुए इस खुलासे ने लोगों के मन में कई सारे प्रश्न खड़े कर दिए हैं। एस्परगर सिंड्रोम  क्या है, ये समस्या क्यों होती है और जिन लोगों को ये दिक्कत है उन्हें किस तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है?
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आइए बिल गेट्स की इस बीमारी के बारे में विस्तार से समझते हैं।

बिल गेट्स - फोटो : ANI
एस्परगर सिंड्रोम और इसके कारण होने वाली दिक्कतों को जानिए

एस्परगर सिंड्रोम क्या होता है, इसे जानने से पहले ये जानना भी आपके लिए जरूरी है कि कुछ वर्षों पहले तक इस सिंड्रोम को मानसिक स्वास्थ्य की समस्या के रूप में जाना जाता था। हालांकि बाद में विशेषज्ञों ने इसके लक्षणों और इसके कारण होने वाली समस्याओं को देखते हुए इसे ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (एएसडी) का हिस्सा मानना शुरू कर दिया। मेडिकल साइंस में इसे न्यूरोडेवलपमेंट समस्या के रूप में जाना जाता है। 

एस्परगर सिंड्रोम का कोई डाइग्नोसिस भी नहीं है, इसका मतलब है कि अब डॉक्टर्स इसे कोई 'विशेष बीमारी' नहीं मानते हैं बल्कि इसे संबंधित बीमारियों का एक हिस्सा माना जाता है। 

अब वापस इस बीमारी पर लौटते हैं। 

एस्परगर सिंड्रोम से प्रभावित लोगों के लिए दैनिक जीवन के कई कार्यों में कठिनाई हो सकती है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण ये है कि प्रभावित लोगों के लिए नॉन-वर्वल कम्युनिकेशन जैसे आई कॉन्टैक्ट, चेहरे के भाव और बॉडी लैग्वेज प्रकट करना कठिन होता है। 

ऐसे लोगों के लिए दूसरे लोगों से बातचीत शुरू करने या बातचीत जारी रखने में भी कठिनाई हो सकती है। किसी वाक्य को बार-बार बोलने से बातचीत और संवाद और भी कठिन होने लगता है।

ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर- मस्तिष्क की समस्या - फोटो : Freepik.com
एस्परगर सिंड्रोम होता क्यों है?

विशेषज्ञों को अभी भी ठीक से पता नहीं है कि एस्परगर सिंड्रोम होने का कारण क्या है? लेकिन कुछ अध्ययनकर्ताओं का मानना है कि यह आनुवंशिकी और पर्यावरणीय कारकों के संयोजन के कारण हो सकता है। जीन में होने वाले बदलाव भी एएसडी में अहम भूमिका निभाते हैं।

इस सिंड्रोम के शिकार लोगों के जब मस्तिष्क का अध्ययन किया गया तो पता चला कि ऐसे लोगों के ब्रेन का साइज थोड़ा अलग हो सकता है जो उनके सोचने, कार्य करने और अपने आस-पास की दुनिया के साथ जुड़ने के तरीके को प्रभावित करता है।
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मस्तिष्क संबंधी समस्याओं का इलाज - फोटो : Adobe Stock
इसका क्या इलाज है?

एस्परगर सिंड्रोम का वैसे तो कोई परीक्षण (टेस्ट) नहीं है, हालांकि लक्षणों के आधार पर डॉक्टर इस समस्या का निदान कर सकते हैं। चूंकि अब इसे ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (एएसडी) का हिस्सा माना जाता है इसलिए इसका उपचार भी इसी आधार पर होता है।

एएसडी चूंकि मस्तिष्क संबंधी अंतर की समस्या है, कोई बीमारी नहीं इसलिए इसका इलाज नहीं है बल्कि सपोर्टिव थेरेपी दी जाती है। सहायक चिकित्सा आपके दैनिक जीवन में आने वाली किसी भी चुनौती से निपटने में मदद कर सकती है। 



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नोट: 
यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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