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AI & Health: अब AI बताएगा अगले 20 साल में कैंसर होगा या नहीं? पहले से ही जान सकेंगे सेहत का हिसाब-किताब

Sat, 20 Sep 2025 05:15 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि ये एआई टूल एक दशक से भी पहले किसी व्यक्ति में कैंसर सहित 1,000 से अधिक बीमारियों के जोखिम का पूर्वानुमान लगा सकता है।
 
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कैंसर का खतरा - फोटो : Amarujala.com
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विस्तार
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जिन गंभीर रोगों के कारण हर साल लाखों लोग मौत का शिकार हो रहे हैं, कैंसर उनमें शीर्ष पर है। साल 2022 के आंकड़ों के अनुसार, दुनिया भर में कैंसर के लगभग 2 करोड़ नए मामले सामने आए और 97 लाख मौतें हुईं। विशेषज्ञों का अनुमान है कि जनसांख्यिकीय बदलावों के साथ शराब-धूम्रपान, मोटापा और लाइफस्टाइल से संबंधित गड़बड़ियों के चलते कैंसर के मामले साल-दर-साल बढ़ते जा रहे हैं। साल 2022 में फेफड़े, स्तन और कोलोरेक्टल कैंसर के सबसे ज्यादा मामले रिपोर्ट किए गए।

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हाल के वर्षों के आंकड़े उठाकर देखें तो पता चलता है कि युवा और मध्यम आयु वर्ग के साथ बच्चे भी कैंसर का शिकार होते जा रहे हैं। असली मुश्किल यह है कि कैंसर अक्सर अपने शुरुआती चरणों में चुपचाप पनपता रहता है और जब तक इसके लक्षण सामने आते हैं, तब तक यह तीसरे या चौथे स्टेज में पहुंच चुका होता है। देर से डायग्नोसिस होने पर मरीज की बचने की संभावना 50% से भी कम रह जाती है।

आज के समय में कैंसर को समय रहते पकड़ने के लिए कई अत्याधुनिक तकनीकें विकसित हो चुकी हैं। ऐसे ही एक हालिया रिपोर्ट में वैज्ञानिकों की एक टीम ने बताया कि उन्होंने एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) टूल विकसित किया है जिसकी मदद से करीब 20 साल पहले ही अंदाजा लगाया जा सकेगा कि आपको भविष्य में कैंसर होगा या नहीं?

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कैंसर का खतरा - फोटो : Adobe stock photos
एआई टूल बताएगा आपको किन बीमारियों का खतरा

वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि ये एआई टूल एक दशक से भी पहले किसी व्यक्ति में कैंसर सहित 1,000 से अधिक बीमारियों के जोखिम का पूर्वानुमान लगा सकता है।

यूरोपियन मॉलिक्यूलर बायोलॉजी लैबोरेटरी (ईएमबीएल), जर्मन कैंसर रिसर्च सेंटर और कोपेनहेगन विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों को उम्मीद है कि यह नई तकनीक, उच्च जोखिम वाले रोगियों की पहचान करने और वर्षों पहले ही बीमारियों का पता लगाने में मदद कर सकती है। 

यह जनरेटिव एआई टूल इस बात का पता लगाने में मदद करता है कि क्या भविष्य में उस व्यक्ति को कैंसर, हृदय रोग और मधुमेह जैसी संभावित जानलेवा बीमारियां हो सकती हैं?

समय रहते बीमारियों का हो सकेगा निदान - फोटो : Freepik.com
अगले 20 साल के स्वास्थ्य जोखिमों का चलेगा पता 

नेचर जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन के मुख्य लेखक और मॉलिक्यूलर बायोलॉजी के विशेषज्ञ टॉमस फिट्जगेराल्ड कहते हैं, चिकित्सा संबंधी घटनाएं अक्सर पूर्वानुमानित पैटर्न का पालन करती हैं। हमारा एआई मॉडल उन पैटर्नों को सीखता है और भविष्य में होने वाले स्वास्थ्य जोखिमों का पूर्वानुमान लगा सकता है।'

डेल्फी-2 एम नामक ये मॉडल रोगी के मेडिकल हिस्ट्री के साथ-साथ धूम्रपान, शराब की आदत और अधिक वजन जैसे जीवनशैली कारकों का आकलन करता है ताकि यह अनुमान लगाया जा सके कि भविष्य में 20 साल तक क्या हो सकता है?

कैंसर का बढ़ रहा है खतरा, रहें सावधान - फोटो : Adobe stock photos
क्या कहते हैं शोधकर्ता?

इस मॉडल को 4 लाख रोगियों के डेटा पर टेस्ट किया गया, जिसके अच्छे परिणाम देखे गए हैं। शोधकर्ताओं को उम्मीद है कि अगले कुछ वर्षों में दुनियाभर के लोग इससे लाभान्वित हो सकेंगे।

ईएमबीएल के कार्यकारी निदेशक, प्रोफेसर इवान बिर्नी कहते हैं, जब आप डॉक्टर के क्लिनिक में जाते हैं और चिकित्सक कुछ उपकरणों का इस्तेमाल करके बताते हैं कि आपके भविष्य में ये चार बड़े जोखिम हैं और इन्हें बदलने के लिए आप ये दो चीजे कर सकते हैं। ये एआई मॉडल भी उसी तरह से है।

प्रोफेसर बिर्नी कहते हैं, इस टूल के साथ कम करते हुए अब तक के अनुभवों से मैं कह सकता हूं कि सभी को वजन कम करने के लिए कहा जाएगा। अगर आप धूम्रपान करते हैं तो आपको धूम्रपान छोड़ने के लिए कहा जाएगा। यही वह भविष्य है जिसे हम बनाना चाहते हैं।'
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कैंसर का खतरा और बचाव - फोटो : Adobe stock photos
बीमारियों के समय रहते निदान से कम होगा स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव

अब तक के डेटा से पता चलता है कि स्तन, प्रोस्टेट और फेफड़ों के कैंसर बहुत तेजी से बढ़ सकते हैं। जबकि बच्चों और युवाओं में 63,000 से अधिक मामले सामने आने की आशंका है। 

इडेल्फी-2एम ऐसे लोगों में लंबी अवधि में इस बीमारियों के जोखिमों का पता लगाने में मददगार माना जा रहा है। अगर ये व्यापक रूप से सफल रहता है तो हम भविष्य में कैंसर और कई अन्य प्रकार की क्रॉनिक बीमारियों और इससे होने वाली मौतों को संभवत: रोक सकते हैं। 



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स्रोत
Learning the natural history of human disease with generative transformers


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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