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अलर्ट: बच्चों को मोटापे से बचाने के लिए जंक फूड पर लगाम जरुरी

Sun, 30 May 2021 07:25 AM IST
Kuldeep Singh हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • भारत में मोटापे से ग्रसित बच्चों की संख्या 1.44 करोड़ है और 2025 तक बढ़कर 1.7 करोड़ हो जाएगी। विशेषज्ञों का कहना है कि मोटापे को महामारी का रूप लेने से रोकने के लिए जंक फूड शुगरयुक्त व हानिकारक तत्व से तैयार खाद्य पदार्थों के खाने पर रोक लगानी होगी। बच्चों को सेहत के प्रति जागरूक करना होगा। पोष्टिक आहार के लिए उन्हें प्रेरित करना होगा।
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मोटापा - फोटो : Pixabay
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विस्तार
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बच्चों को मोटापे से बचाने के लिए जरूरी कदम उठाने होंगे। मोटापे से ग्रसित बच्चों की बढ़ती संख्या को देखते हुए विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों को शुगर व जंक फूड जैसे खाद्य पदार्थों पर लगाम लगानी होगी। तभी उन्हें मोटापे से बचाया जा सकता है।

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एम्स ऋषिकेश, इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स, इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ लिवर एंड बिलियरी साइंसेज के विशेषज्ञों का कहना है कि मोटापे को महामारी का रूप लेने से रोकने के लिए जंक फूड शुगरयुक्त व हानिकारक तत्व से तैयार खाद्य पदार्थों के खाने पर रोक लगानी होगी।

1.7 करोड़ हो जाएगी देश में मोटापे से ग्रसित बच्चों की संख्या 2025 तक
भारत में मोटापे से ग्रसित बच्चों की संख्या 1.44 करोड़ है। 2025 तक बढ़कर 1.7 करोड़ हो जाएगी। खाद्य पदार्थों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के निर्देश के अनुसार, खाद्य पदार्थ के पैकेट पर फ्रंट ऑफ पैकेज लेबलिंग खाद्य पदार्थ को तैयार करने इस्तेमाल चीजों की विस्तृत जानकारी होनी चाहिए।
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भारत में अन्य देशों की तुलना में तेजी से पांव पसार रहा मोटापा, चीनी युक्त खाद्य पदार्थ बढ़ा
खानपान के तौर-तरीकों में तेजी से बदलाव के कारण दुनिया के अन्य देशों की तुलना में भारत में मोटापा तेजी से पांव पसार रहा है। चीनी युक्त खाद्य पदार्थों के इस्तेमाल के बाजार में भारत वैश्विक स्तर पर शीर्ष 5 देशों की सूची में दूसरे नंबर पर है।

सरकार का नियंत्रण नहीं 
चिंतित वैज्ञानिकों का कहना है कि बच्चों को सेहत के प्रति जागरूक करना होगा। पोष्टिक आहार के लिए उन्हें प्रेरित करना होगा। खासतौर से कोरोना के दौर में जब सारा खेल मजबूत रोग प्रतिरोधक क्षमता पर निर्भर करता है। सरकार को भी पैक व प्रोसेस खाद्य पदार्थों को लेकर सख्त कदम उठाने होंगे। 

सभी की जिम्मेदारी 
एम्स ऋषिकेश के निदेशक डॉ रविकांत का कहना है, नीति बनाने वाले की भी यह सारी जिम्मेदारी है कि वह बच्चों के खाद्य पदार्थों के मानक तय करें। जरा सी चूक से भविष्य के लिए हम सेहत की नई परेशानियां खड़ी कर रहे हैं।

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