मानसिक रोगों से ग्रस्त बच्चों को सहज महसूस कराना अभिभावकों के लिए बड़ी चुनौती होती है। काफी दिनों से घर के बाहर रहने के कारण वे अपने भाइयो-बहनों या अन्य सदस्यों से जल्दी घुल-मिल नहीं पाते। सभी सदस्यों को भी उनके साथ बर्ताव को लेकर काफी सजग रहना होता है। ऐसे रोगियों को यह पसंद नहीं होता कि उन्हें ज्यादा लोग सलाह–मशविरा दें। इसलिए एक निश्चित दूरी भी रखना जरूरी है।
जूम या वीसी जैसी वीडियो सेवाओं के माध्यम से चिकित्सक मनोरोगियों को टेलीथेरैपी दे रहे हैं। साथ ही घर वालों को भी उनकी देखभाल की जानकारी भी दी जा रही है। चिकित्सक रोगियों को वायरस से बचने के लिए दैनिक जीवन में स्वच्छता अपनाने के टिप्स भी दे रहे हैं।
- परेशान रोगी उठा रहे आत्महत्या जैसा कदम...
विशेषज्ञों का कहना है कि पहले से ही मानसिक विकारों से ग्रस्त रोगियों पर कोरोना का भय दोहरी प्रताड़ना जैसा है। ऐसे में उनके परिवारजनों द्वारा रोक-टोक पर वे कई दफा अतिउग्र हो जाते हैं। लॉकडाउन में मानसिक रोगियों द्वारा आत्महत्या जैसा कदम उठाने की घटनाएं भी सामने आई हैं।