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बुद्ध पूर्णिमा 2019: भगवान बुद्ध ने दिया है जीवन में एकाग्र और खुश रहने का अनमोल ज्ञान

Sat, 18 May 2019 02:51 PM IST
पंखुड़ी सिंह लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
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बुद्धा पूर्णिमा भारत में मनाए जाने वाले खास त्योहारों में से एक है। इस वर्ष 18 मई यानी आज के दिन ये पर्व मनाया जा रहा है। बुद्ध पूर्णिमा इसलिए भी खास है क्योंकि इस दिन भगवान बुद्ध से जुड़ी तीन महत्वपूर्ण तिथियां एकसाथ पड़ती हैं। भगवान बुद्ध का जन्म, ज्ञान प्राप्ति और महापरिनिर्वाण ये तीनों चीजें एक ही दिन हुई थीं। आगे जानिए भगवन बुद्ध से जुडी खास बातें। 
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सुखी जीवन के लिए बुद्ध के सूत्र 
वैशाख पूर्णिमा भगवान बुद्ध के जीवन से जुड़ी तीन अहम बातों - बुद्ध का जन्म, बुद्ध को ज्ञान प्राप्ति एवं बुद्ध का निर्वाण के कारण भी विशेष तिथि मानी जाती है। गौतम बुद्ध ने चार सूत्र दिए उन्हें 'चार आर्य सत्य' के नाम से जाना जाता है। पहला दुःख है, दूसरा दुःख का कारण, तीसरा दुःख का निदान और चौथा मार्ग वह है, जिससे दुःख का निवारण होता है। भगवान बुद्ध का अष्टांगिक मार्ग वह माध्यम है, जो दुःख के निदान का मार्ग बताता है। उनका यह अष्टांगिक मार्ग ज्ञान, संकल्प, वचन, कर्म, आजीव, व्यायाम, स्मृति और समाधि के सन्दर्भ में सम्यकता से साक्षात्कार कराता है। 


 

इस स्थान पर प्राप्त हुआ महानिर्वाण
भगवान बुद्ध का धर्म प्रचार 40 वर्षों तक चलता रहा। अंत में उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में पावापुरी नामक स्थान पर 80 वर्ष की अवस्था में ई.पू. 483 में वैशाख की पूर्णिमा के दिन ही महानिर्वाण प्राप्त हुआ। 

 

विदेशों में भी मनाई जाती है बुद्ध पूर्णिमा
बुद्ध पूर्णिमा न सिर्फ भारत में अपितु  दुनिया के कई अन्य देशों में भी पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। श्रीलंका, कंबोडिया, वियतनाम, चीन, नेपाल थाईलैंड, मलयेशिया, म्यांमार, इंडोनेशिया जैसे देश शामिल हैं। श्रीलंका में इस दिन को 'वेसाक' के नाम से जाना जाता है, जो निश्चित रूप से वैशाख का ही अपभ्रंश है। इस दिन बौद्ध मतावलंबी बौद्ध विहारों और मठों में इकट्ठा होकर एक साथ उपासना करते हैं। दीप प्रज्जवलित कर बुद्ध की शिक्षाओं का अनुसरण करने का संकल्प लेते हैं। 
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कुशीनगर में लगता है विशला मेला
बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर कुशीनगर के महापरिनिर्वाण मंदिर में एक महीने तक चलने वाले विशाल मेले का आयोजन किया जाता है, जिसमें देश विदेश के लाखों बौद्ध अनुयायी यहां पहुंचते हैं। वहीं आज के दिन बोधगया में जिस बोधिवृक्ष (पीपल वृक्ष) के नीचे भगवान बुद्ध को बुद्धत्व की प्राप्ति हुई थी इस वृक्ष की जड़ों में दूध और सुगंधित पानी का सिंचन करके पूजा की जाती है। 
 
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