भारत के संविधान निर्माता बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर
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आंबेडकर ने अर्थशास्त्र और राजनीति शास्त्र में बॉम्बे यूनिवर्सिटी से 1913 में डिग्री ली। इसके बाद उन्होंने कोलंबिया यूनिवर्सिटी से राजनीति विज्ञान में पोस्टग्रेजुएशन के लिए अमेरिका गए। इसके बाद साल 1916 में उन्हें एक शोध के लिए पीएचडी से सम्मानित किया गया। अंबेडकर लंदन से अर्थशास्त्र में डॉक्टरेट करना चाहते थे, लेकिन उनका यह सपना बीच में ही अधूरा रह गया। उनकी स्कॉलरशिप खत्म हो गई थी, जिस वजह से उन्हें पढ़ाई बीच में छोड़कर भारत वापस आना पड़ा था।
भारत वापस लौटकर आंबेडकर ट्यूटर बनने से लेकर कंसल्टिंग का काम शुरू किया, लेकिन सामाज में भेदभाव की वजह से उन्हें इसमें सफलता न मिल सकी। इसके बाद वह मुंबई के सिडनेम कॉलेज में प्रोफैसर नियुक्त हुए। फिर 1923 में उन्होंने 'द प्रॉब्लम ऑफ द रुपी' नाम से एक शोध किया, जिसके लिए उन्हें लंदन यूनिवर्सिटी ने डॉक्टर्स ऑफ साइंस की उपाधि दी। इसके बाद साल 1927 में उन्हें कोलंबंनिया यूनिवर्सिटी ने भी उन्हें पीएचडी की डिग्री दी गई। आंबेडकर के लिए यह सफर इतना आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने सामाज के आगे घुटने नहीं टेके और यही कारण है कि वह निरंतर आगे बढ़ते गए।
आंबेडकर के 10 अनमोल विचार
आंबेडकर के 10 अनमोल विचार:
-जब तक आप सामाजिक स्वतंत्रता नहीं हासिल कर लेते, कानून आपको जो भी स्वतंत्रता देता है, वो आपके किसी काम की नहीं।
-कानून और व्यवस्था राजनीतिक शरीर की दवा है और जब राजनीतिक शरीर बीमार पड़े तो दवा जरूर दी जानी चाहिए।
-जो कौम अपना इतिहास तक नही जानती है वे कौम कभी अपना इतिहास भी नही बना सकती है
-शिक्षित बने, संघटित रहे और संघर्ष करे
-उदासीनता एक ऐसे किस्म की बीमारी है जो किसी को प्रभावित कर सकती है
-यदि हम एक संयुक्त एकीकृत आधुनिक भारत चाहते हैं तो सभी धर्मों के शास्त्रों की संप्रभुता का अंत होना चाहिए।
-हम सबसे पहले और अंत में भी भारतीय है
-मैं ऐसे धर्म को मानता हूं, जो स्वतंत्रता, समानता और भाईचारा सिखाए।
-मनुष्य नश्वर है, उसी तरह विचार भी नश्वर हैं। एक विचार को प्रचार-प्रसार की जरूरत होती है, जैसे कि एक पौधे को पानी की, नहीं तो दोनों मुरझाकर मर जाते हैं।
-बुद्धि का विकास मानव के अस्तित्व का अंतिम लक्ष्य होना चाहिए।