सबसे पहले मैं जिस लेखक को पढ़कर खूब हंसा था, वह थे मैक्स शलमैन। मेरे पास उनकी कुछ पुरानी किताबें थीं, जिनमें से एक जेब्रा डर्बी मुझे बहुत मनोरंजक लगती थी। फिर मैंने कई अन्य हास्य-व्यंग्य लेखकों को पढ़ा। मैं हमेशा से लिखना चाहता था।
लिखने से पहले मैं अपने क्लास के लिए कहानियां बुनता था। हालांकि मैं हास्य लेखकों का ज्यादा प्रशंसक नहीं था, लेकिन शलमैन और पेरेलमैन के अनुकरण के दौरान मैंने पाया कि मैं विनोदपूर्ण लेखन कर सकता हूं।
जब मैंने टेलीविजन और थियेटर के लिए लिखना शुरू किया, तो उसी दौरान हास्य अभिनेता के रूप में एक कैबरे में काम कर रहा था। एक दिन एक पत्रिका ने मुझे कुछ लिखने का प्रस्ताव भेजा। मैंने शतरंज के बारे में एक हास्य रचना लिखी। मेरी पत्नी ने जब उसे पढ़ा, तो उसने कहा कि यह तो बहुत अच्छी रचना है, इसे न्यूयॉर्कर में क्यों नहीं भेजते।
न्यूयॉर्कर में छपना एक बड़ी बात थी। इसलिए मैंने उसे न्यूयॉर्कर को भेज दिया और उन्होंने उसे प्रकाशित कर दिया। न्यूयॉर्कर में अपनी छपी रचना को देख मेरा उत्साह बहुत ज्यादा बढ़ गया। फिर तो लिखने का सिलसिला चल निकला।
मुझे लगता है कि अगर आपके पास हास्यात्मक नजरिया है, तो आप किसी भी चीज को उसी तरह से देखते हैं। लेकिन इसे लगातार, अंतहीन नवीकरण की जरूरत होती है। यह जीवन की समस्याओं से जूझने का एक तरीका है। लोग सोचते हैं कि विनोदप्रिय होना मुश्किल है, लेकिन यह दिलचस्प चीज है। अगर आप हंस सकते हैं, तो आपको कोई मुश्किल नहीं आएगी।
(वुडी एलन अमेरिकी लेखक, निर्देशक और हास्य-अभिनेता हैं)