साजन, आशिकी और दिल है कि मानता नहीं, 90 के दशक की इन 3 बेहतरीन फिल्मों के गीत लिखने वाले समीर हिंदी गीतों की दुनिया में एक सुहावना नाम है। इन्होंने मुख्य रूप से प्रेम के गीत लिखे, जिनमें भावुक क्षण अनायास स्वर लहरियों के साथ निकलते हैं। समीर अंजान के पुत्र हैं। अंजान का असली नाम लालजी पांडेय था। अंजान को हिंदी भाषा के सबसे लोकप्रिय कवियों में से एक माना जाता है। अंजान की तरह ही बेटा समीर ने भी मुंबई में गीतों की दुनिया का सरताज बनने के लिए कड़ी मशक्कत की। एम.कॉम की पढ़ाई पूरी करने के बाद समीर पिता अंजान के पास मुंबई चले गए। जहां उन्हें काफी संघर्ष के बाद फिल्म 'बेकरार' में ब्रेक मिला।
समीर के गीत आज भी आदमी मन में बरबस गुनगुनाते हैं
संगीत निर्देशकों बप्पी लाहिड़ी, नदीम श्रवण, आनंद-मिलिंद, अनु मलिक के संगीत में समीर के कुछ गीत आज भी आदमी मन में बरबस गुनगुनाते हैं। मेरा दिल भी कितना पागल है जो प्यार तुम्ही से करता है, दिल है कि मानता नहीं, नजर के सामने जिगर के पास जैसे गीत आज भी प्रेम के यादगार गीत माने जाते हैं। गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में अपना नाम अंकित कराने वाले समीर कक्षा सातवीं से गीत लिखने की शुरुआत की। वह हमेशा गीतों को नया परवान देने के लिए कोशिश करते रहते थे। समीर एक समय तो काफी लोकप्रिय गीतकार हो चुके थे। 90 के दौर में लगभग हर गीत समीर के ही लिखे होते थे। फ़िल्म आशिकी का गाना सांसों की ज़रुरत है जैसे समीर का पसंदीदा गाना है, जो उन्होंने फ़िल्म कुर्बानी के गाने हम तुम्हें चाहते हैं ऐसे से प्रेरित होकर लिखा था।
समीर अपने करियर में 5,500 से अधिक गाने लिख चुके हैं
समीर ने पूरे करियर में 'दिल', 'आशिकी', 'दीवाना', 'हम हैं राही प्यार के', 'बेटा', 'साजन', 'सड़क', 'जुर्म', 'बोल राधा बोल', 'दीवाना', 'आंखें', 'शोला और शबनम', 'कुली नंबर 1', 'हीरो नंबर 1', 'बीवी नंबर 1', 'दिल है कि मानता नहीं' के गीत लिखे। 'राजा हिन्दुस्तानी', 'फिजा', 'धड़कन', 'कुछ कुछ होता है', 'कभी खुशी कभी गम', 'देवदास', 'तेरे नाम', 'धूम', 'सांवरिया', 'कृष', 'हाउसफुल 2', 'दबंग-2' में भी उन्होंने गीतों की अपनी कलम चलाई। एक अनुमान के मुताबिक समीर अपने करियर में 5,500 से अधिक गाने लिख चुके हैं।
समीर को आनंद बक़्शी और मजरूह सुल्तानपुरी काफी पसंद हैं
समीर को फिल्मफेयर में तीन बार सर्वश्रेष्ठ गीतकार का सम्मान मिला। समीर को 1991 में फिल्म 'आशिकी' के गाने 'नजर के सामने', 1993 में फिल्म 'दीवाना' के गाने 'तेरी उम्मीद तेरा इंतजार' और 1994 में फिल्म 'हम है राही प्यार के' के गाने 'घूंघट की आड़' के लिए सर्वश्रेष्ठ गीतकार का फिल्मफेयर पुरस्कार मिला। 24 फरवरी 1958 को जन्में समीर को अभिनेताओं में अमिताभ बच्चन काफी पसंद हैं। समीर को गीतकारों में अपने पिता अंजान के अलावा आनंद बक़्शी और मजरूह सुल्तानपुरी काफी पसंद हैं। समीर कहते हैं ऐसा इसलिए क्योंकि इनके लिखने का अंदाज उनको बहुत अच्छा लगता है। नए गीतकारों में इरशाद कामिल में वह बेहतरीन प्रतिभा देखते हैं।
समीर के गीत के हर बोल प्रेम से सराबोर कर देते हैं
प्रेम के गीत लिखना काफी मुश्किल है। प्रेम आदमी के मन में सदैव हरा भरा नहीं रहता। आदमी जीवन में हमेशा आशा और प्रेम से भरा नहीं रह सकता। अगर किसी के साथ ऐसा है तो वह दुनिया का सबसे खुशहाल इंसान है। लेकिन अमूमन अधिकांश आदमी के लिए प्रेम के साथ जीवन में अवसाद, दुख, निराशा आदि के भाव भी होते हैं। लेकिन समीर के गीत के हर बोल आपको प्रेम से हमेशा के लिए सराबोर कर देते हैं। यही खासियत है समीर और उनके गीतों की।