फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पहली दलित स्त्री आत्मकथा लिखने वाली शांताबाई कांबळे का 100 वर्ष की आयु में देहावसान

Thu, 26 Jan 2023 09:36 AM IST
काव्य डेस्क अमर उजाला काव्य डेस्क - नयी दिल्ली

सार

प्रसिद्ध आत्मकथा 'मझ्या जलमाची चित्रकथा' की लेखिका, पहली दलित महिला आत्मकथाकार, शिक्षिका शांताबाई कांबले का आज 101 वर्ष की आयु में पुणे में उनकी बेटी मंगल (गौरी) तिरमारे के निवास पर निधन हो गया।
विज्ञापन
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

प्रसिद्ध आत्मकथा 'मझ्या जलमाची चित्रकथा' की लेखिका, पहली दलित महिला आत्मकथाकार, शिक्षिका शांताबाई कांबले का आज 101 वर्ष की आयु में पुणे में उनकी बेटी मंगल (गौरी) तिरमारे के निवास पर निधन हो गया। उनके पार्थिव शरीर का आज रात 8 बजे बौद्ध शैली में नवी मुंबई के कोपरखैरने स्थित श्मशान घाट में अंतिम संस्कार किया जाएगा।
विज्ञापन


शांताबाई कांबले अत्यधिक गरीबी से उठकर शिक्षिका बनीं। उन्होंने सांगली जिले में शिक्षा और सामाजिक क्षेत्र में बहुत योगदान दिया है। शांताबाई कांबले के निधन से अंबेडकरी आंदोलन को क्षति हुई है। उनके पुत्र स्वर्गीय अरुण कांबले भारतीय दलित पैंथर के अध्यक्ष थे। उनका आत्मकथात्मक धारावाहिक ‘त्रिखा’ दूरदर्शन पर लोकप्रिय हुआ था।

दलित मित्र शांताबाई कृष्णाजी कांबले को "नजुका" के नाम से जाना जाता था, जो उनकी आत्मकथा मेरे जलमाची चित्रकथा से लोकप्रिय हुई और 1990 के दूरदर्शन धारावाहिक नेखरा में नायिका के चरित्र के रूप में प्रमुखता से आईं।
विज्ञापन


एक लोकप्रिय टीवी धारावाहिक, नेक्रुति पर मेरे जलमाची चित्रकथा, उनकी आत्मकथा थी। उस कहानी में नायिका "नजुका" का चरित्र बेहद लोकप्रिय हुआ और पूरे महाराष्ट्र से उसे तूफानी प्रतिक्रिया मिली। शांताबाई कृष्णा कांबले वर्तमान में अपनी बेटी मगनल नारायण तिरमारे के साथ औंध (पुणे) में रह रही थीं। उन्हें सरकार के दलित मित्र पुरस्कार से भी नवाजा गया था।

शांताबाई का जन्म 1 मार्च 1923 को पो. अटपडी, जिला-सांगली में हुआ था। उन्हें 16 जनवरी 1942 को सोलापुर जिला स्कूल बोर्ड में एक शिक्षक के रूप में नियुक्त किया गया था। वह जिले की पहली दलित शिक्षिका बनीं। 1952 में, उन्होंने महिला कॉलेज, पुणे से प्रशिक्षण महाविद्यालय का द्वितीय वर्ष उत्तीर्ण किया। कुछ समय तक उन्होंने सांगली जिले के जाट तालुका में शिक्षा विस्तार अधिकारी के रूप में कार्य किया।
28 फरवरी 1981 को सेवानिवृत्त होने के बाद, उन्होंने मराठी साहित्य में एक दलित महिला की पहली आत्मकथा लिखी। यह आत्मकथा 10 अगस्त 1990 से 'नजुका' नाम से मुंबई दूरदर्शन पर एक धारावाहिक के रूप में प्रस्तुत की गई। फ्रेंच, अंग्रेजी और हिंदी भाषाओं में अनुवाद प्रकाशित हुआ।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें