आज फ़िर से उसी मुकाम पर खड़ी हूँ जहां से पलट कर जाना कभी नहीं चाहती थी |
उसके आने से एक अरसे बाद मुस्कुराएं थे हम
पर क्या पता था जहा से शुरुआत हुई थी हमारी हंसी की वही से ही किसी की नज़र ने उसे फ़िर उन्हीं आंसुओं में डुबो दिया |
कल तक हर वक़्त उसके बारे में सोचना अच्छा लगता था आज उसी सोच से डर लगता है।
फिर से दिल टूटा है तो क्या हुआ.... फिर हम सोचने लगे यह तो बना ही है टूटने के लिए, बार- बार टूटे या फिर एक बार
कोई शिकायत नहीं किसी से बस दुःख है तो इस बात का उसे अपनी मुस्कराहट समझने की गलती कर बैठे। .
आज जाना है की जब तन्हाई से रिश्ता बन जाए तो और कोई रिश्ता नहीं जुड़ सकता, चाहे कितनी भी कोशिश कर लो... हर कोई आता है ज़िंदगी में सिर्फ और सिर्फ जाने के लिए। .....
किस्मत से कोई शिकयत नहीं क्योंकि उसे लाई भी यही थी और वापिस भी यही लेकर जा रही है |
जो मेरा है ही नहीं उसके लिए रोना क्या और जो मेरा हो कर भी मेरा नहीं हुआ उसके खोने का गम भी क्या करें |
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