फीमेल ठग शीर्षक से लिखी चौथी कहानी आपको थोड़ा निराश कर सकती है। एक लड़की है राधिका, जिसके जीवन का कोई ओर-छोर ही नहीं है। एक लड़के को फंसा कर शादी करना और उसकी मौत से पहले और बाद ढेर सारे लड़कों की प्रेमिका बन कर उसे धोखा देना। कहानी के अवसान से पहले उसकी जिंदगी में आई एक एनजीओ से जुड़ी महिला से शायद कहानी की शुरुआत करना सही हो सकता था। यही महिला उस लड़की की वह कहानी दुनिया के सामने लाती है, जो उसकी है ही नहीं। खुद को ठगा महसूस करती है, लेकिन तबतक राधिका के बताए झूठ के पुलिंदों पर लिखी कहानी उसे (राधिका) को संघर्षशील महिला का तमगा दे चुकी होती है। आपको ये भ्रम भी हो सकता है कि कहीं ये महिला किताब की लेखिका शिवांगी तो नहीं। या फिर उसकी कोई करीबी। खैर ये अंतहीन कहानी 10, 20, 30...यहां तक कि 100 पन्ने भी और बढ़ाई जा सकती है, लेकिन इस कहानी का कोई मतलब न तब निकलता और न ही अब निकलता है।
आखिरी कहानी 'अधूरे ख्वाब' आपमें से कइयों को अपनी लग सकती है। मीलों हम आ चुके, मीलों जाना बाकी है....ऐसे ख्वाब देखने वाले युवाओं की कहानी। युवा जो गांवों से हैं, ग्रेजुएट कहलाने की दहलीज पर हैं। कहानी के पहले किरदार का संघर्ष और उसके ख्वाब पढ़ते हुए आपको एक बार फिर यह लेखिका की ही कहानी होने का भ्रम हो सकता है, लेकिन अन्य किरदारों के जीवन का संघर्ष पढ़ते हुए आप इससे निकलते हैं और कहानियों के साथ आपकी उत्सुकता बढ़ती जाती है। उत्सुकता इन युवाओं के ख्वाब पूरे होने की। पंख काटे जाने के बावजूद ये युवा आसमान में ऊंची उड़ान भरने को आतुर हैं। कई बार अपने सपने पूरे करने में हम बहुत अकेले पड़ जाते हैं।
सन्मति प्रकाशन से आई यह किताब इसी महीने आई है और पिछले कुछ हफ्ते से सोशल मीडिया पर चर्चा में है। दरअसल, इन कहानियों में शिवांगी ने सामान्य बोलचाल की भाषा का प्रयोग किया है, जो पाठकों तक उनकी पहुंच आसान बनाता है। उनका यह कहानी संग्रह युवा पाठकों को खासा पसंद आ रहा है। इन कहानियों के पात्रों के जीवन में जो अच्छे-बुरे दौर आते हैं, जो नीरस या रोचक मोड़ आते हैं, उनमें से कुछ तो पाठकों के जीवन में भी आती होंगी। इन कहानियों को पढ़ते हुए युवा पाठक वैसी गलतियां करने से बच जाएं तो किताब की सार्थकता होगी।