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SAFALTA Talks : कंपनियों के लिए मार्केटिंग, ब्रांडिंग और सेल्स का जंक्शन बना सोशल मीडिया : राकेश सिंह

Tue, 24 Sep 2024 12:17 PM IST
Pushpendra Mishra Media Solution Initiative

सार

  • विषय : सोशल मीडिया का सेल्स में इस्तेमाल
  • अतिथि वक्ता : राकेश सिंह, प्रोफेसर एवं एसोसिएट डीन, आईएमटी गाजियाबाद
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Social Media Use in Sales - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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सफलता.कॉम द्वारा सोशल मीडिया का सेल्स में इस्तेमाल विषय पर आयोजित मास्टर क्लास सेशन में अतिथि वक्ता प्रोफेसर एवं एसोसिएट डीन, आईएमटी गाजियाबाद, राकेश सिंह ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि आप कभी ये न सोचें कि आपका कोई एक काम ठीक नहीं हो रहा तो यहां पर आपकी भूमिका खत्म हो जाती है। क्योंकि इस यूनिवर्स में हमेशा आपके लिए कुछ न कुछ इंतजार कर रहा है जो आपको अच्छा लगेगा। आप उसे ज्यादा पसंद करेंगे। तो सवाल है आप उसके लिए तैयार रहेंगे या नहीं। मेरा कहना यही है कि जो भी अवसर आपके लिए आएंगे आपको उसके लिए तैयार रहना होगा।

 

मार्केटिंग है एक बड़ा विषय
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डॉ. सिंह ने कहा कि मार्केटिंग एक बहुत बड़ा विषय है। जैसे सोशल मीडिया का इस्तेमाल मार्केट में उत्पाद की जागरूकता बनाने के लिए किया जा सकता है। लोगों की रुचि जगाने के लिए किया जा सकता है। कई मार्केटिंग कैंपेन ऐसे भी होते हैं जो ग्राहक को जागरूक करने के साथ-साथ उत्पाद में न सिर्फ उनकी रुचि जगाते हैं बल्कि उन्हें ऑर्डर देने के लिए भी प्रेरित करते हैं। जैसे फेसबुक पर संचालित पीपीसी कैंपेन जिनमें नो मोर, या ऑर्डर नाउ जैसे विकल्प होते हैं जिनसे सीधे ग्राहक पेज पर जा सकता है।

 

मार्केटिंग फनल

उन्होंने कहा कि सबसे पहले हम किसी उत्पाद को सर्च करते हैं। जिसमें सोशल मीडिया पर भी उस उत्पाद के बारे में जानकारी आपको दिख जाती है। जब आपको जानकारी मिल गई तो आप ये ढूंढ़ने लगते हैं कि अब इस उत्पाद को कहां से खरीदें। जब हमने उत्पाद को इस्तेमाल कर लिया तो उसके बाद का जो व्यवहार है वो भी बहुत महत्वपूर्ण है। जैसे कई लोग किसी उत्पाद को इस्तेमाल करने के बाद लोग जो सोशल मीडिया पर लिखते हैं वह प्रोडक्ट का फीडबैक माना जाता है। ब्रांड से कस्टमर तक के लिए जितनी मार्केटिंग प्रयास हैं वह बी2सी मार्केटिंग कैटेगरी में आते हैं।

 

आपके बिजनेस पर निर्भर करती है इंफ्लुएंसर मार्केटिंग

डॉ सिंह ने कहा कि जैसे किसी को इंफ्लुएंसर से मार्केटिंग करानी है तो यह निर्भर करता है आपके बिजनेस प्रकार पर और आपके पास बजट कितना है। जब आप इंफ्लुएंसर्स को देख रहे हैं तो देखें कि उसका प्रभाव कितना है लोगों पर और आपके लिए अगर वह एड करेगा तो कितना इंगेजमेंट पर वह पैदा कर सकता है। साथ ही यह भी देखें कि जो इंफ्लुएंसर है उसकी क्या पोजिशन है और आपके ब्रांड की क्या पोजिशन है। अगर दोनों में तारतम्य नहीं है तो उससे एड कराने का कोई फायदा नहीं।

 

सोशल मीडिया पर एड में लोगों की जानकारी जरूर मांगे

सोशल मीडिया के जरिये जो कंपनियां एड कर रही हैं औऱ उन्हें फायदा नहीं हो रहा तो क्या करें सवाल पर डॉ. सिंह ने कहा कि जो भी एड आप कर रहे हैं उससे आपको लोगों का ये रिस्पांस आना जरूरी है कि हां, मुझे रुचि है। कई लोग ऐसे होते हैं जो सिर्फ अपने ब्रांड की पोजिशन को लोगों के दिमाग में डालने की कोशिश करते हैं। लेकिन कोशिश ये करें कि जो भी लोग आपके एड को देख रहे हैं उनका डेटाबेस ले लें। ताकि उनसे बाद में कनेक्ट किया जा सके।

 

सीखना और सिखाना ये दोनों काम है जरूरी

युवाओं को पहली जॉब में क्या करना चाहिए, सवाल पर डॉ. सिंह ने कहा कि अगर पहली जॉब है, इंटर्नशिप है या ट्रेनिंग पीरियड है जो भी है उसे आपको ऐसे लेना चाहिए ये एक सीखने का अवसर है औऱ मैं इसे मन लगाकर सीखूंगा। जो भी संभव श्रेष्ठ सीख इससे मिलेगी उसे मैं आत्मसात करूंगा। इसके अलावा जहां भी आप काम करने जाएं, वहां आपको सीखना तो है ही लेकिन आपको ऐसी मानसिकता भी रखनी होगी कि अगर वहां किसी को कोई ऐसी चीज नहीं आ रही जिसे आप करना जानते हैं तो उन्हें जरूर सिखाएं। क्योंकि आज के दिन ज्ञान केवल स्कूल या कॉलेज तक सीमित नहीं रहा। इंटरनेट पर भी आजकल बहुत सारा ज्ञान उपलब्ध है। एक बेहतर तरीका ये हो सकता है जैसे कोई चीज ऑफिस में किसी को नहीं पता, आपने कहा कि इसे मैं करूंगा। आप घर गए और रात में आपने इंटरनेट के जरिये जानकारी निकाली और एक शीट तैयार की। सुबह आप उसे ऑफिस के लोगों को दिखा सकते हैं कि ये मैंने रात में ढूंढ़कर निकाला है। इससे आपके सीखने की क्षमता हमेशा विकसित होती रहेगी। सीखना और ज्ञान को शेयर करना ये दोनों चीजें ही बहुत महत्वपूर्ण हैं।

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