शासनादेश जारी होने की तिथि तक सहायक अध्यापक के लिए अर्हता रखने वाले अभ्यर्थी ही परिषदीय विद्यालयों के लिए घोषित होने वाले 16448 सहायक अध्यापकों के पद पर आवेदन करेंगे। प्रदेश के बेसिक शिक्षा सचिव की ओर से की गई इस घोषणा के साथ उन्हीं के विभाग से जुड़े सचिव परीक्षा नियामक कार्यालय के लोग हवा निकालने की कोशिश में लगे हैं। सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी की ओर से 16448 शिक्षकों की भर्ती की अंतिम तिथि बीतने के एक दिन पहले बीटीसी-2013 बैच का रिजल्ट आनन-फानन में जारी करने की कोशिश पूरी प्रक्रिया पर ही सवालिया निशान लगा रहा है।
शासन एवं परीक्षार्थियों के दबाव में आकर परीक्षा नियामक कार्यालय की ओर से बीटीसी-2013 का परिणाम घोषित किया जाना पूरी प्रक्रिया को जांच के दायरे में शामिल कर दिया है। बीटीसी-2013 की कॉपियों के मूल्यांकन में गड़बड़ी का आरोप लगाकर बीटीसी-2011 एवं 2012 बैच के प्रशिक्षुओं ने इसके दोबारा मूल्यांकन की मांग की है। अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया था कि परीक्षा नियामक कार्यालय के एक बाबू विजय शंकर पांडेय ने पैसा लेकर कापियों के मूल्यांकन में गड़बड़ी की थी। इस बात को लेकर अभ्यर्थियों की शिकायत के बाद संबंधित बाबू का तबादला कर दिया गया।
बीटीसी-2013 के अभ्यर्थी अब परीक्षा परिणाम घोषित हो जाने के बाद से 16448 सहायक अध्यापकों की भर्ती के लिए आवेदन कर सकेंगे। यदि बीटीसी-2013 के प्रशिक्षु बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से घोषित पदों केलिए आवेदन करने में सफल हो गए तो यह प्रशिक्षु कोर्ट में याचिका दाखिल करके उन्हें भी भर्ती में मौका देने के लिए गुहार लगा सकते हैं। मामला न्यायालय गया तो पूरी शिक्षक भर्ती प्रक्रिया विवादों में फंस सकती है।