यूपी पीईटी का परीक्षा पैटर्न
यूपी पीईटी परीक्षा का आयोजन उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) करता है। यह परीक्षा ऑफलाइन (OMR शीट) पर आयोजित होती है और इसकी अवधि दो घंटे होती है।
परीक्षा में कुल 100 बहुविकल्पीय (MCQ) प्रश्न पूछे जाते हैं। प्रत्येक सही उत्तर के लिए 1 अंक दिया जाता है। परीक्षा में नेगेटिव मार्किंग भी लागू है। प्रत्येक गलत उत्तर पर 0.25 अंक काटे जाएंगे।
- कुल प्रश्न : 100
- कुल अंक : 100
- परीक्षा अवधि : 2 घंटे
- प्रत्येक सही उत्तर : 1 अंक
- गलत उत्तर पर : 1/4 अंक की नेगेटिव मार्किंग
यूपी पीईटी परीक्षा का सिलेबस क्या है?
यूपी पीईटी परीक्षा का प्रश्नपत्र आयोग द्वारा निर्धारित सिलेबस के आधार पर तैयार किया जाएगा। सिलेबस को कुल 15 सेक्शन में विभाजित किया गया है और प्रत्येक सेक्शन से तय अंक के प्रश्न पूछे जाएंगे।
| विषय |
अंक |
| भारतीय इतिहास |
5 |
| भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन |
5 |
| भूगोल |
5 |
| भारतीय अर्थव्यवस्था |
5 |
| भारतीय संविधान एवं लोक प्रशासन |
5 |
| सामान्य विज्ञान |
5 |
| प्रारंभिक अंकगणित |
5 |
| सामान्य हिंदी |
5 |
| तर्क एवं तर्कशक्ति |
5 |
| करेंट अफेयर्स |
10 |
| जनरल अवेयरनेस |
10 |
| अपठित हिंदी गद्यांश का विवेचन एवं विश्लेषण |
10 |
| ग्राफ की संख्या एवं विश्लेषण |
10 |
| तालिका की व्याख्या एवं विश्लेषण |
10 |
यूपी पीईटी स्कोर से किन भर्तियों में आवेदन कर सकते हैं?
यूपी पीईटी एक प्रारंभिक पात्रता परीक्षा है। इसका स्कोर सीधे नौकरी नहीं दिलाता, बल्कि उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की विभिन्न भर्तियों के लिए आवेदन करने की पात्रता प्रदान करता है। यूपी पीईटी स्कोर के आधार पर अभ्यर्थी कई ग्रुप 'सी' भर्तियों में आवेदन कर सकते हैं। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं-
- लेखपाल भर्ती
- ग्राम विकास अधिकारी (VDO) भर्ती
- जूनियर असिस्टेंट भर्ती
- क्लर्क / ऑफिस असिस्टेंट भर्ती
- एक्साइज कांस्टेबल भर्ती
- वन रक्षक भर्ती
- पंचायत सहायक भर्ती
- तकनीकी एवं लैब असिस्टेंट भर्ती
- ग्रुप 'सी' की अन्य विभिन्न भर्तियां
यूपीएसएसएससी पीईटी स्कोर कितने समय तक रहेगा मान्य?
यूपीएसएसएससी पीईटी 2026 का स्कोर परिणाम जारी होने की तारीख से तीन वर्ष तक मान्य रहेगा। इसी स्कोर के आधार पर आयोग विभिन्न ग्रुप 'सी' भर्तियों की मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यर्थियों को शॉर्टलिस्ट करेगा। यदि परीक्षा एक से अधिक शिफ्ट में आयोजित होती है, तो परिणाम तैयार करने के लिए नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया अपनाई जाएगी।