फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

UGC: असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती के लिए पीएचडी की अनिवार्यता की डेट बढ़ाई, आयोग ने जारी किया नोटिस

Tue, 12 Oct 2021 09:01 PM IST
वर्तिका तोलानी जॉब डेस्क, अमर उजाला

सार

UGC: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने कोविड-19 की स्थिति को देखते हुए विश्वविद्यालयों के विभागों में सहायक प्रोफेसरों की सीधी भर्ती के लिए अनिवार्य योग्यता के रूप में पीएचडी को 1 जुलाई 2021 से 1 जुलाई 2023 तक बढ़ा दिया गया है।
विज्ञापन
यूजीसी - फोटो : पीटीआई
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

सहायक प्रोफेसरों को काम पर रखने के लिए पीएचडी की न्यूनतम पात्रता बनाने वाले यूजीसी के 2018 के नियम 2021 से लागू होने थे। हालांकि, कोविड-19 महामारी के कारण इसे स्थगित कर दिया गया था। अब, मानदंड को जुलाई 2023 तक बढ़ा दिया गया है। यानी यूजीसी नेट स्कोर के आधार पर हायरिंग जारी रहेगी।

विज्ञापन

इस कदम से उच्च शिक्षा संस्थानों के रिक्त पदों को सामान्य से अधिक तेजी से भरने की उम्मीद है। यूजीसी ने एक आधिकारिक नोटिस में कहा कि यूजीसी ने कोविड-19 महामारी को देखते हुए सहायक प्रोफेसरों की सीधी भर्ती के लिए अनिवार्य योग्यता के रूप में पीएचडी की तिथि को 1 जुलाई, 2021 से बढ़ाकर 1 जुलाई, 2023 करने का फैसला किया है।

Trending Videos

ऐसे समझिए पूरे नियम
मौजूदा मानदंडों के अनुसार नैट, सेट, एसएलईटी सहित शिक्षक पात्रता परीक्षा के लिए अर्हता प्राप्त करने वाले उम्मीदवार सहायक प्रोफेसर के पद के लिए आवेदन करने के पात्र हैं। जिन उम्मीदवारों को यूजीसी के नियमों के अनुसार पीएचडी की डिग्री प्रदान की गई है, उन्हें नेट/स्लेट/सेट की न्यूनतम पात्रता शर्त की आवश्यकता से छूट दी जाएगी। आधिकारिक बयान के मुताबिक 01.07.2023 से विश्वविद्यालयों के विभाग में सहायक प्रोफेसर के पद पर सीधी भर्ती के लिए पीएचडी डिग्री अनिवार्य योग्यता होगी। इस संशोधन को यूजीसी (विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में शिक्षकों और अन्य शैक्षणिक कर्मचारियों की नियुक्ति के लिए न्यूनतम योग्यता और उच्च शिक्षा में मानकों के रखरखाव के लिए उपाय), संशोधन विनियमन, 2021 के रूप में जाना जाएगा।
विज्ञापन

पहले इस वजह से नहीं लागू किया था नियम
इससे पहले, यूजीसी को नीति को लागू करने में देरी की मांग करते हुए कई अभ्यावेदन प्राप्त हुए थे, जिसमें दावा किया गया था कि यह नेट योग्य उम्मीदवारों को नकारात्मक रूप से प्रभावित करेगा। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग विनियम, 2018 के तहत सहायक प्रोफेसरों को काम पर रखने के लिए पीएचडी की न्यूनतम आवश्यकता को मंजूरी दी गई है। हालांकि, यह सुनिश्चित करने के लिए कि वे तत्काल कार्यान्वयन से वंचित न रहें 2018 में, उम्मीदवारों को पीएचडी पूरी करने के लिए तीन साल का समय दिया गया था।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें