रेलवे बोर्ड ने सभी रेलवे जोन के महाप्रबंधकों अंतरिम आदेश जारी किया है। इसमें कहा गया है कि बोर्ड ने समय-समय पर पदोन्नति रिक्तियों को भरने की आवश्यकता पर बल देते हुए यह निर्देश जारी किए गए हैं। इसमें कहा गया है कि रेलवे को चयन/गैर-चयन/ट्रेड टेस्ट/एलडीसीई (सीमित विभागीय प्रतियोगी परीक्षा)/जीडीसीई (सामान्य विभागीय प्रतियोगी परीक्षा) जैसे पदोन्नति के सभी तरीकों का उपयोग करना सुनिश्चित करना चाहिए, जिससे कि रिक्तियों को समय पर भरा जा सके।
आदेश में कहा गया कि जोनल रेलवे को उनके यहां खाली पदों का ब्योरा तैयार करना चाहिए और उन पर भर्ती की योजना बनानी चाहिए। जोन इसके लिए विशेष अभियान चला सकते हैं। यह देखने में आया है कि जोनल रेलवे अपने साथ साझा की जाने वाली गूगल-शीट पर मासिक पदोन्नति और तिमाही लक्ष्यों से संबंधित आंकड़े नियमित रूप से नहीं भर रहे हैं।
अधिकारियों ने कहा कि ये शीट रेलवे में रिक्तियों का एक केंद्रीय डेटाबेस बनाती हैं। कहा गया है कि अपेक्षित डेटा को तुरंत भरने की व्यवस्था की जाए, क्योंकि उच्चतम स्तर पर स्थिति की निगरानी की जा रही है। कुल मिलाकर, अधिकारियों ने कहा कि कर्मचारियों की कमी राष्ट्रीय ट्रांसपोर्टर के साथ हर वक्त समस्या बनी हुई है।
रेलमंत्री ने राज्यसभा में दी थी जानकारी
जबकि रेलवे द्वारा नवीनतम रिक्ति डेटा प्रदान नहीं किया गया है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव द्वारा दिसंबर 2022 में राज्यसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, भारतीय रेलवे में कुल 3.12 लाख गैर-राजपत्रित पद खाली पड़े थे। इनमें सिग्नल और दूरसंचार विभाग में कुल 14,815 और यातायात परिवहन विभाग में 62,264 रिक्तियां हैं। उनके उत्तर के अनुसार सबसे अधिक रिक्तियां सिविल इंजीनियरिंग विभाग में थीं, जिसमें देश भर में 87,654 रिक्तियां थीं, उसके बाद यांत्रिक विभाग में 64,346 और विद्युत विभाग में 38,096 रिक्तियां थीं।
रेल मंत्री वैष्णव ने राज्यसभा को सूचित किया था कि दक्षिण पूर्व रेलवे जिसके तहत बहानगा बाजार स्टेशन - 2 जून की त्रासदी का स्थल है, में अराजपत्रित पदों के लिए 17,811 रिक्तियां और 3 फरवरी, 2023 तक 150 रिक्त राजपत्रित पद हैं। 2019 में, रेलवे ने एक मेगा भर्ती अभियान शुरू किया और वर्तमान में चयनित उम्मीदवारों की नियुक्ति की प्रक्रिया चल रही है। इस अभियान से राष्ट्रीय ट्रांसपोर्टर में एक लाख से अधिक पदों को भरने की उम्मीद है।