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TGT-PGT की भर्ती से जुड़ी अहम खबर, जरूर पढ़िए

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उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड में परीक्षा विभाग का अलग से गठन किया जाएगा। माध्यमिक विद्यालयों के लिए होने वाली शिक्षक भर्ती परीक्षाओं में अभ्यर्थियों की संख्या 10 लाख से अधिक पहुंचने पर अब चयन बोर्ड में परीक्षा नियंत्रक की नियुक्ति होगी। परीक्षा नियंत्रक के अधीन विभाग पर ही टीजीटी-पीजीटी परीक्षाओं के संचालन के साथ मूल्यांकन, प्रश्नपत्र की आपत्तियों का निस्तारण, परीक्षा परिणाम की जिम्मेदारी होगी।
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उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड में अब आवेदनपत्र जारी करने के बाद परीक्षा कराने की जिम्मेदारी से सचिव एवं अध्यक्ष को मुक्त रखा जाएगा। सचिव एवं अध्यक्ष के पास प्रशासनिक कार्यभार के साथ इंटरव्यू कराने की जिम्मेदारी होगी। चयन बोर्ड के सदस्यों को भी अब परीक्षा की जिम्मेदारी से अलग रखा जाएगा।

शिक्षक भर्ती के लिए अलग परीक्षा नियंत्रक नियुक्त करने का प्रस्ताव चयन बोर्ड अध्यक्ष एवं सचिव की ओर से शासन को भेजा गया है। प्रमुख सचिव माध्यमिक ने भी इस मामले में सकारात्मक रुख अपनाया है। उम्मीद है कि इसको हरी झंडी मिलते ही अगली टीजीटी-पीजीटी परीक्षा से नई व्यवस्था लागू कर दी जाएगी।
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बोर्ड के सचिव जितेंद्र कुमार ने बताया कि अध्यक्ष, सचिव एवं बोर्ड के सदस्यों को परीक्षा कराने की जिम्मेदारी से अलग रखा जाएगा। परीक्षा के दौरान अध्यक्ष, सदस्यों एवं सचिव को सिर्फ निगरानी के लिए लगाया जाएगा। सदस्य एवं अध्यक्ष मात्र साक्षात्कार के समय ही अपनी भूमिका निभा सकेंगे।
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चयन बोर्ड ने नहीं माने हॉकी के अंतर्राष्ट्रीय नियम

उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड की टीजीटी शारीरिक शिक्षा के प्रश्नों पर परीक्षार्थियों की आपत्तियों के बाद भी संशोधित उत्तर में भी गलती दूर नहीं की गई है। अंतर्राष्ट्रीय हॉकी फेडरेशन की ओर से जारी हॉकी के नियमों को दरकिनार कर चयन बोर्ड ने मनमानी उत्तर जारी किए हैं।

चयन बोर्ड ने हॉकी स्टिक का वजन 28 औंस यानी 793.78 ग्राम माना है, जबकि अंतर्राष्ट्रीय हॉकी फेडरेशन के नियम के अनुसार हॉकी स्टिक का वजन 26 औंस यानी 737 ग्राम से अधिक नहीं हो सकता है। परीक्षार्थियों के 26 औंस के उत्तर को चयन बोर्ड गलत मान रहा है।

चयन बोर्ड की ओर से 25 जनवरी को हुई टीजीटी शारीरिक शिक्षा की परीक्षा की आंसर-की 31 जनवरी को चयन बोर्ड की वेबसाइट पर अपलोड कर दी गई थी। आंसर-की में कई प्रश्नों के उत्तर गलत थे, परीक्षार्थियों ने इसे लेकर चयन बोर्ड के पास आपत्तियां भेजी थी।

परीक्षार्थियों की आपत्ति के बाद 12 मई को संशोधित आंसर-की जारी की गई। परीक्षार्थियों का कहना है कि चयन बोर्ड की मनमानी से उनका भविष्य दांव पर लगा है। परीक्षार्थियों ने विशेषज्ञ पैनल से जांच कराने की मांग की है। मांगों की अनदेखी करने पर परीक्षार्थी कोर्ट जाएंगे।
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