बता दें कि मामले में दायर 16 विभिन्न याचिकाओं पर उच्च न्यायालय की ओर से तीन फरवरी से लगातार सुनवाई की जा रही थी।याचिकाकर्ताओं का कहना था कि छठी जेपीएससी परीक्षा के परिणाम में काफी गड़बड़ियां हैं। याचिकाकर्ताओं के वकील ने अदालत को बताया कि जेपीएससी ने क्वालीफाइंग पेपर के अंक जोड़कर फाइनल रिजल्ट तैयार किया था, जो कि गलत है। इसके साथ ही रिजल्ट तैयार करने में और भी हेरफेर की गई है। इस आधार पर, याचिकाकर्ताओं ने रिजल्ट को निरस्त कर दोबारा नए सिरे से परिणाम जारी करने की मांग की थी।
जबकि, झारखंड सरकार की ओर से पैरवी कर रहे महाधिवक्ता राजीव रंजन व जेपीएससी की ओर से अधिवक्ता संजय पिपरवाल ने याचिकाओं का विरोध किया था। उन्होंने अदालत को बताया कि जेपीएससी ने छठी सिविल सेवा परीक्षा का परिणाम विज्ञापन की शर्तों के अनुरूप ही जारी किया था। इस परिणाम के जरिये 326 उम्मीदवारों को सफल घोषित किया गया था। परिणाम प्रकाशित करने के बाद नियुक्ति अनुशंसा के लिए नाम राज्य सरकार को भेजे गए थे।