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Interview Tips: इंटरव्यूअर को ऐसे मूर्ख बनाने की कोशिश करते हैं अभ्यर्थी, क्या आप भी करते हैं ये गलती?

Wed, 12 Mar 2025 05:40 PM IST
शिवम गर्ग जॉब्स डेस्क, अमर उजाला

सार

Interview Tips: साक्षात्कार में सफल होने के लिए ईमानदारी जरूरी है, लेकिन कुछ उम्मीदवार झूठे दावे, फर्जी अनुभव या घुमावदार जवाब देकर इंटरव्यूअर को प्रभावित करने की कोशिश करते हैं, जो उल्टा उनके चयन को नुकसान पहुंचा सकता है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Freepik
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विस्तार
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Interview Tips: इंटरव्यू में सफल होना हर उम्मीदवार का लक्ष्य होता है, लेकिन कुछ लोग अपनी कमियों को छिपाने या खुद को ज्यादा काबिल दिखाने के लिए इंटरव्यूअर को मूर्ख बनाने की कोशिश करते हैं। हालांकि, अनुभवी इंटरव्यूअर इन ट्रिक्स को तुरंत पकड़ लेते हैं, जिससे उम्मीदवार की छवि खराब हो सकती है और उसका चयन मुश्किल हो सकता है। आइए जानते हैं कि आमतौर पर उम्मीदवार किन तरीकों से इंटरव्यूअर को भ्रमित करने की कोशिश करते हैं और इससे बचने का सही तरीका क्या है।

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क्या आप भी कर रहे हैं ये गलतियां?
इंटरव्यू के दौरान साक्षात्कारकर्ताओं को मूर्ख बनाने की कोशिश करना किसी भी रूप में लाभकारी नहीं होता। इसके बजाय, अगर आप सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाते हुए अपनी असलियत को पेश करते हैं, तो यह आपको लंबे समय में निश्चित रूप से सफलता दिलाएगा। हर इंटरव्यू में अपनी ईमानदारी और साक्षात्कार की तैयारी को ध्यान में रखकर ही सही फैसले लें।


इंटरव्यू स्किल्स ट्रेनर रि. कर्नल संजीत सिरोही का मानना है कि जब आप इंटरव्यू में जाते हैं, तो सबसे महत्वपूर्ण सवालों में से एक यह होता है कि "आपकी स्ट्रेंथ और वीकनेस क्या हैं?" यह सवाल इसलिए पूछा जाता है क्योंकि यह आपके बारे में जानने का तरीका है। अगर आप अपनी स्ट्रेंथ और वीकनेस के बारे में सही तरीके से जानते हैं, तो आप अपने बारे में सटीक जानकारी दे पाएंगे और यह आपके आत्मविश्वास को भी बढ़ाएगा। लेकिन, यहां पर एक बड़ी समस्या होती है कि ज्यादातर कैंडिडेट्स रटे हुए जवाब देते हैं और अपनी असल पर्सनालिटी को छुपा लेते हैं। इस वजह से उन्हें इंटरव्यू में चुनने के बजाय रिजेक्ट कर दिया जाता है।

इंटरव्यू में अपनी स्ट्रेंथ और वीकनेस को कैसे करें प्रस्तुत

रि. कर्नल संजीत सिरोही ने कहा कि बचपन से ही हमे अक्सर यह बताया जाता है कि "तुम ये ठीक नहीं कर रहे हो, वह ठीक नहीं कर रहे हो", लेकिन स्ट्रेंथ के बारे में बताने वाले लोग बहुत कम होते हैं। यही कारण है कि हम अपनी स्ट्रेंथ को पहचान नहीं पाते। वहीं, वीकनेस के बारे में तो हमें पता होता है, लेकिन हम उसे बताते नहीं हैं क्योंकि हमें लगता है कि अगर हमने अपनी वीकनेस बता दी तो इंटरव्यूअर हमें रिजेक्ट कर देगा। हालांकि, वीकनेस को छुपाना गलत नहीं है, लेकिन हमें इसे सही तरीके से प्रस्तुत करना चाहिए। अपनी वीकनेस को इस तरह से बताना चाहिए कि यह उतनी गंभीर न हो, और यह भी दिखाना चाहिए कि हम उसे सुधारने के लिए प्रयास कर रहे हैं।

कई अभ्यर्थी देते हैं रटे हुए जवाब

उन्होंने आगे बताया कि कई बार हमें अपनी वीकनेस का पता होता है, लेकिन हम उसे बताने से डरते हैं। हम यह सोचते हैं कि अगर हम अपनी वीकनेस बताने लगे तो सामने वाला क्या सोचेगा। इसलिए हम इसे छुपाते हैं या फिर रटे हुए जवाब देते हैं, जैसे "मैं लोगों पर बहुत विश्वास कर लेता हूं" या "मैं हर चीज को परफेक्ट चाहता हूं"। अब, ये बातें स्ट्रेंथ की तरह तो लगती हैं, लेकिन वीकनेस के तौर पर नहीं। उदाहरण के तौर पर अगर कोई कहता है "मेरी वीकनेस है कि मैं लोगों पर बहुत भरोसा कर लेता हूं", तो मैं कहता हूं, "यह तो एक स्ट्रेंथ है, तुम्हारी वीकनेस नहीं है।" इसी तरह, "मैं हर चीज को परफेक्ट चाहता हूं" भी कोई वीकनेस नहीं है। यह सिर्फ आपकी सोच का तरीका है।
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इंटरव्यूअर को भ्रमित करने की कोशिश

अगर आप अपनी वीकनेस बताना चाहते हैं तो उसे ईमानदारी से बताइए। जैसे, अगर आप कहते हैं कि "मेरी वीकनेस है कि मैं थोड़ा आलसी हूं या मुझे कभी-कभी झिझक महसूस होती है", तो यह बताना गलत नहीं है। लेकिन अगर आप यह भी जोड़ते हैं कि "मैं इसे सुधारने के लिए पूरी कोशिश कर रहा हूं", तो आपकी वीकनेस एक पॉजिटिव नोट पर खत्म हो जाती है। इसका मतलब यह है कि आप अपनी वीकनेस को स्वीकारते हैं और उसे सुधारने का प्रयास कर रहे हैं, जो एक बड़ी स्ट्रेंथ है।
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