Pakistan: भारत में यूपीएससी के जरिए चुने जाने वाले आईएएस अधिकारी देश की प्रशासनिक रीढ़ माने जाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि पाकिस्तान में भी ऐसा ही एक प्रशासनिक ढांचा है? दोनों देश एक ही दिन आजाद हुए, लेकिन सालों में उनकी राजनीतिक और प्रशासनिक व्यवस्थाएं अलग-अलग राहों पर चल पड़ीं। फिर भी कुछ चीजें अब भी मिलती-जुलती हैं। आइए जानते हैं कि पाकिस्तान में IAS के समकक्ष कौन होता है, उन्हें कैसे चुना जाता है, और भारत के सिस्टम से उनकी तुलना कैसे की जा सकती है।
पाकिस्तान में कैसे होते हैं सिविल सर्वेंट?
जिस तरह भारत में यूपीएससी परीक्षा पास करने के बाद उम्मीदवार आईएएस, आईपीएस, आईएफएस जैसे पदों पर नियुक्त होते हैं, वैसे ही पाकिस्तान में भी एक अलग प्रशासनिक सेवा प्रणाली है। लेकिन वहां इन अधिकारियों को आईएएस नहीं, बल्कि पीएएस (Pakistan Administrative Service) कहा जाता है। नाम में फर्क है, मगर भूमिका काफी हद तक एक जैसी होती है- प्रशासनिक जिम्मेदारियां निभाना, नीतियों को लागू करना और जनता की सेवा करना।
कैसी होती है चयन की प्रक्रिया?
भारत में आईएएस बनने के लिए सिविल सर्विस परीक्षा होती है, वहीं पाकिस्तान में इसे सेंट्रल सुपीरियर सर्विसेज (CSS) परीक्षा कहा जाता है। सीएसएस पास करने के बाद ही कोई उम्मीदवार पीएएस अधिकारी बन सकता है। यह परीक्षा भी भारत की तरह बेहद कठिन मानी जाती है और इसमें लिखित परीक्षा व इंटरव्यू जैसे चरण होते हैं। चयन प्रक्रिया लंबी और चुनौतीपूर्ण होती है, जिसमें हजारों में से कुछ ही उम्मीदवार अंतिम रूप से चुने जाते हैं।
कौन कराता है परीक्षा?
भारत में सिविल सेवा परीक्षा का आयोजन संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) करता है, जबकि पाकिस्तान में यही जिम्मेदारी संघीय लोक सेवा आयोग (FPSC) की होती है। एफपीएससी, पाकिस्तान सरकार की एक संवैधानिक संस्था है जो देशभर में प्रशासनिक पदों के लिए योग्य उम्मीदवारों का चयन करती है। इस प्रकार, दोनों देशों की प्रशासनिक व्यवस्था भले ही अलग नाम से जानी जाती हो, मगर उनकी बुनियादी संरचना और उद्देश्य काफी मिलते-जुलते हैं।