अर्थव्यवस्था में सुधार के साथ संगठित क्षेत्र में रोजगार भी बढ़ रहा है। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के ‘श्रम ब्यूरो सर्वे’ के मुताबिक, अक्तूबर-दिसंबर तिमाही में 9 उद्योगों में श्रमिकों की संख्या 3.14 करोड़ रही।
इनमें पुरुषों की 68.41 फीसदी और महिलाओं की 31.59 फीसदी हिस्सेदारी रही। 2021 की सितंबर तिमाही में यह आंकड़ा 3.10 करोड़ रहा था। इससे पता चलता है कि इस दौरान संगठित क्षेत्र में रोजगार की संख्या चार लाख बढ़ी है।
केंद्रीय श्रम मंत्री भूपेंद्र यादव ने बृहस्पतिवार को ट्वीट में कहा, हमें तिमाही रोजगार सर्वेक्षण के तीसरे दौर (अक्तूबर-दिसंबर, 2021) की रिपोर्ट जारी करते हुए खुशी हो रही है। यह नौ चुनिंदा क्षेत्रों से जुड़ी कंपनियां में रोजगार की बढ़ती प्रवृत्ति की ओर इशारा कर रहा है।
दिसंबर तिमाही में रोजगार देने के मामले में विनिर्माण क्षेत्र की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा 39 फीसदी रही, जबकि शिक्षा में 22 फीसदी श्रमिक थे।
यह सर्वे संगठित क्षेत्र के 5.31 लाख प्रतिष्ठानों पर आधारित है, जो 10 या इससे ज्यादा लोगों को रोजगार देते हैं। इनमें करीब 11,612 यूनिटों का सर्वे किया गया था। देश के कुल रोजगार में 9 संगठित क्षेत्रों की 85 फीसदी हिस्सेदारी है।
इस क्षेत्र में इतने श्रमिक
| क्षेत्र |
संस्थान |
रोजगार |
| विनिर्माण |
1,73,176 |
1.24 करोड़ |
| शिक्षा |
1,78,336 |
69.26 लाख |
| आईटी/बीपीओ |
4,650 |
34.57 लाख |
| स्वास्थ्य |
25,965 |
32.86 लाख |
| व्यापार |
50,204 |
16.81 लाख |
| परिवहन |
12,158 |
13.20 लाख |
| वित्तीय सेवाएं |
43,349 |
8.85 फीसदी |
| आवास-रेस्टोरेंट |
32,392 |
8.11 लाख |
| निर्माण |
8,579 |
6.19 लाख |
कुशल श्रमिकों की कमी से चार फीसदी पद खाली
सर्वे के मुताबिक, दिसंबर तिमाही में सभी नौ प्रमुख क्षेत्रों में श्रमिकों के 1.85 लाख पद खाली थे। इसमें 86.46 फीसदी पद को भरने की प्रक्रिया चल रही थी। 3.98 फीसदी पद कुशल श्रमिकों की कमी से खाली पड़े थे, जबकि 6.28 फीसदी को भरने की आवश्यकता महसूस नहीं की जा रही थी। 3.27 फीसदी पद अन्य वजहों से खाली थे।
कई राज्यों में हालात बेहतर नहीं
सरकार भले ही रोजगार बढ़ने का दावा कर रही है, लेकिन कई राज्यों में राष्ट्रीय औसत से कहीं ज्यादा बेरोजगारी है। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकनॉमी (सीएमआईई) के मुताबिक, इस साल मार्च में देश में 7.6 फीसदी बेरोजगारी थी, जबकि कई राज्यों में यह 25 फीसदी से भी ज्यादा पहुंच गई थी। हरियाणा, जम्मू-कश्मीर और राजस्थान में सबसे ज्यादा बेरोजगारी है। हालांकि, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में हालात बेहतर हैं।