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क्यों लोग नहीं चाहते उनके घर के नीचे से सोना निकले

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अगर आपके आंगन के नीचे से सोना निकले तो आप खुश होंगे, लेकिन झारखंड के परासी गांव के लोग ख़ुश नहीं हैं। वो दुआ मांग रहे हैं कि उनके आंगन के नीचे से सोना ना निकले।
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हां, हर आदमी यह ज़रूर कह रहा है कि पास के पहाड़ के नीचे से निकल आए। दरअसल वो चाहते हैं कि सोने के लिए खुदाई के कारण उनके घर न टूटें।

जियोलॉजिकल सर्वे आफ इंडिया (जीएसआई) के वैज्ञानिकों ने यहां धरती के अंदर सोने की खान होने का अनुमान लगाया है और ज़मीन में एक लाख टन सोना मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
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बरसात के बाद ड्रिलिंग

यहां बरसात के बाद फिर से ड्रीलिंग कराई जाएगी. इसी के बाद इसे गोल्ड ब्लॉक बनाने पर अंतिम फैसला लिया जा सकेगा। परासी 17 टोलों का बड़ा गांव है जहां क़रीब 6,000 लोग रहते हैं।

जीएसआई के लोगों ने यहां विजय सिंह मानकी की 12 एकड़ ज़मीन पर जगह-जगह ड्रीलिंग कराई है। मानकी एक उपाधि है जो मुंडा आदिवासियों में ज़मींदार को दी जाती थी। वो कहते हैं कि अगर यहां सोना निकले तो उन्हें खुशी होगी, यह जमीन पहाड़ी है।

स्थानीय बोली में उसे टुंगरी कहते हैं। उनका कहना है कि यह ज़मीन टुंगरी की है, लिहाजा उन पर इसके गोल्ड ब्लॉक का हिस्सा बन जाने से भी कोई बड़ा फ़र्क नहीं पड़ेगा।
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लोगों को है सरकार से मुआवज़ा मिलने की उम्‍मीद

उन्हें उम्मीद है कि सरकार उन्हें ज़मीन के बदले बेहतर मुआवज़ा देगी, लेकिन उनका कहना है कि गांव के लोगों के घर नहीं टूटने चाहिए।

परासी की सबसे बुज़ुर्ग महिला बुधनी देवी ने कहा कि टुंगरी पर गोल्ड ब्लाक के बदले ग्रामीणों को उस ब्लॉक में नौकरी और ज़मीन का बेहतर मुआवज़ा मिलना चाहिए।

यहाँ आस पास के गांवों की ज़मीन पर भी ड्रिलिंग कराई गई है, उन गांवों में किस्सा ऐसा ही है।
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