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'पुलिस जी बचवा को डरा दीजिए, सोता नहीं है'

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झारखंड की राजधानी रांची में बच्चों को सुलाने के लिए माँएं अब पुलिस कंट्रोल रूम के टोल फ्री नंबर 100 का सहारा लेने लगी हैं। कई मम्मियां पुलिस कंट्रोल रूम में फ़ोन लगाकर कहती हैं, ''मेरे बचवा को डरा दीजिए, सो नहीं रहा है।''
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माँओं की इन टेलीफ़ोन कॉल से रांची पुलिस परेशान है। रांची के एसपी एस कार्तिक ने बीबीसी को बताया कि पुलिस ने आठ से 14 जुलाई के बीच इस तरह के 2420 काल्स रिसीव किए। इससे पुलिस की परेशानी बढ़ी है।

उन्होंने बताया कि पुलिस ने एक-एक नंबर से 25-25 बार तक ब्लैंक या फालतू के काल्स रिसीव किए। कोई अपने बच्चों को सुलाने के लिए कहता है, तो किसी को नींद नहीं आ रही होती।
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लड़कियां भी पुलिस कंट्रोल रूम में फ़ोन करके मस्ती करने से नहीं हिचकती हैं। पुलिस ने एक प्रेस कांफ्रेंस कर अपनी परेशानी सार्वजनिक तौर पर जाहिर की। उसने लोगों से सहयोग की अपील की है।
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धारा 353 के तहद कार्रवाई की जाएगी

पुलिस के मुताबिक़ आठ से 14 जुलाई के बीच पुलिस ने शिकायत संबंधी 15, सूचना संबंधी 100, पूछताछ संबंधी 35, रांग नंबर के 380, नकली काल 655 और 2420 ब्लैंक काल रिसीव किए। पुलिस अब ऐसे लोगों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करेगी। पुलिस अधीक्षक (एसपी) कार्तिक ने बताया कि ईद के बाद पहले तो हम ऐसे लोगों को फोन पर ही समझाएंगे। अगर वो फिर भी नहीं मानते तो उनके ख़िलाफ़ इंडियन पीनल कोड (आईपीसी) की धारा 353 के तहद कार्रवाई की जाएगी।

रांची पुलिस को आठ से 14 जुलाई के बीच 2420 ब्लैंक काल किए गए। इस धारा के तहत सरकारी काम में बाधा डालने का मुकदमा दर्ज किया जाता है, क्योंकि ऐसे ब्लैंक काल्स के कारण पीसीआर का नंबर ज़रूरतमंद लोगों को बिज़ी मिलता है। कार्तिक कहते हैं, ''हम जनता की सेवा करने आए हैं, लोगों का मन लगाने या उन्हें सुलाने नहीं।'' रांची पुलिस के कंट्रोल रूम में फिलहाल तीन लाइनें हैं। इन्हें बढ़ाकर पांच करने का प्रस्ताव है ताकि लोगों को फोन एंगेज न मिले।
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