हैदराबाद ब्लास्ट मामले में रांची में पकड़े गये आतंकी मंजर इमाम ने खुलासा किया है कि रांची के सात युवक प्रतिबंधित आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिद्दीन (सिमी) से जुड़े हैं। राष्टीय जांच एजेंसी (एनआईए) की टीम द्वारा मंजर इमाम से की गई पूछताछ में यह और अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं।
मंजर ने एनआईए के सामने यह कबूल किया की इन युवकों का मुख्य काम आतंकवादियों को पनाह देना, किराये का घर दिलाना, बेल दिलाना व घटना को अंजाम देने के बाद उनके भागने की व्यवस्था करना होता है। मंजर ने इन युवकों के नाम भी बताये हैं।
पूछताछ मंजर इमाम ने बताया कि साल 2008 में सूरत और अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट में घायल चार आतंकियों का इलाज उसके सहयोग से बरियातू स्थित एक बड़े अस्पताल में हुआ था। मंजर ने ही उनके रहने के लिए बरियातू इलाके में किराये पर मकान दिलाया था।
एनआईए को पूछताछ में मंजर इमाम ने यह भी बताया कि दिसंबर 2007 में केरल के एर्नाकुलम स्थित बागमौन जंगल में उसने सिमी के कैंप में तीन दिन तक प्रशिक्षण लिया था।
पटना निवासी अब्दुल वाशर के माध्यम से वह सिमी से जुड़ा था। वाशर को सूरत ब्लास्ट में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया था। मंजर इमाम से प्राप्त जानकारी की सूचना एनआईए की ओर से पुलिस अधिकारियों को भी दी गयी है।