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क्या भारत की मलाला बन पाएगी झारखंड की ये गुड्डी?

Fri, 09 Oct 2015 02:37 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, नई दिल्ली
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संजीता भारत की मलाला हो सकती थी, जब उसने बंदूक और हिंसा का रास्ते छोड़कर अपने जीवन की शुरुआत नए तरीके से करने की सोची थी।। उसने खुद के उज्जवल भविष्य के बारे में सोच कर अपना दाखिला स्कूल में कराया था, लेकिन उसके सपने बनने से पहले ही बिखर गए, उसे उसी गोली का शिकार होना पड़ा, जिस पर वो पहले किसी का नाम लिखा करती रही होगी।
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संजीता को माओवादियों ने इस शक में मार दिया कि वो पुलिस के लिए उनकी जासूस कर रही है। खून से लथपथ उसका शरीर गुमला की पहाड़ियों के पास झारखण्ड में बीते बृहस्पतिवार को मिला। संजीता को लोग उसके गांव में गुड्डी नाम से भी जानते थे।

11 साल की उम्र में उसे लालच दिया गया कि वो डाकुओं के समूह में शामिल हो सकती है, जिसके बाद वो बावर्ची से एक पक्के निशानेबाज में कब तब्दील हो गई उसे खुद पता नहीं चला।
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हर रोज मिलती है धमकी

20 साल की उम्र में वो विद्रोहियों के गढ़ से भाग निकलने में सफल हो गई और पहाड़ियों के पास ही एक कमरे घर किराए पर लिया और अपना दाखिला एक स्थानीय स्कूल में कराया लेकिन माओवादी हर रोज धमकाते रहते।

अंग्रेजी अखबार हिन्दुस्तान टाइम्स के अनुसार गुड्डी अपनी जिंदगी पर मंडरा रहे खतरे के डरावने के किस्से से वाकिफ थी, लेकिन वो वापस उस दुनिया में नहीं जाना चाहती थी और अपनी पढ़ाई लिखाई को लेकर पूरी तरह से तत्पर थी।

पहले परोसती थी खाना

अखबार के मुताबिक वो सरेंडर नहीं करना चाहती क्योंकि ऐसा करने पर माओवादी उसके परिवारीजनों का कत्ल कर देंगे। उसने यह भी कहा था कि 'मैं तब तक अपनी पढ़ाई जारी रख पाउंगी, जब तक मुझे कोई पहचान न पाए औऱ मेरे सरदार मुझे वापस जबर्दस्ती जंगल में न लेकर जाएं।'

लेकिन उसका सपना, सपना ही रह गया। उसका गांव भी माओवादियों की जद में था। गुड्डी के मुताबिक उसे पड़ोस की ही माओवादी नेता सविता दीदी जो ने ही इस समूह में शामिल होने का लालच दिया था।

कुछ समय तक वो वहां के लोगों को खाना परोसती थी और बनाती भी थी लेकिन धीरे-धीरे वो इंसास राइफल और निशानेबाजी में पक्की हो गई। गुड्डी को अपने जोनल कमॉण्डर कंचन से प्यार हो गया और वो उससे उससे शादी भी करने वाली थी, लेकिन इससे पहले वो एनकाउंटर में पुलिस के हाथों मारा गया।
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एबॉर्शन आम बात

गुड्डी ने कहा था कि 'माओवादी नेता हर रोज महिलाओं का शोषण करते हैं लेकिन इसे ऐसा बताया जाता जैसे यह सब आम सहमति के साथ हो रहा हो।' उसने कहा था कि 'इन समूहों में महिलाओं का एबॉर्शन एक आम बात है और इसी वजह से वो मां नहीं बन सकती।'

गुड्डी ने बताया था कि बीते अप्रैल में जब उसने कैंप छोड़ा था उस वक्त वहां 23 छोटी लड़कियां थी जिसमे से कुछ 10 साल तक के उम्र की थी। बीते मंगलवार जब वो अपने परिवारीजनों से मिलने गई थी तभी माओवादियों ने उसका अपहरण कर लिया।

वो लोग वहां एक लिखित नोट भी छोड़ गए थे, जिसमें लिखा था कि गुड्डी को मरना होगा क्योंकि कई चेतावनियों के बाद भी उसने अपना रास्ता नहीं बदला।
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