रांची की एक अदालत ने कथित आक्रामक फेसबुक पोस्ट को लेकर गिरफ्तार की गई एक कॉलेज छात्रा को कुरान की प्रतियां दान करने की शर्त पर जमानत देने के अपने आदेश में बुधवार को संशोधन किया। न्यायिक मजिस्ट्रेट मनीष कुमार सिंह ने ऋचा भारती को सशर्त जमानत दी थी और कहा था कि वह कुरान की एक प्रति पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में स्थानीय अंजुमन कमेटी और चार अन्य प्रति शहर के विभिन्न पुस्तकालयों को दान करे।
रांची की अदालत ने ऋचा को कुरान की पांच प्रतियां बांटने की शर्त पर जमानत दी थी। जज ने 19 वर्षीय ऋचा भारती को यह कहकर जमानत दी कि उसे 15 दिनों के अंदर कुरान की पांच प्रतियां बांटनी होंगी। बता दें कि सात हजार रुपये के दो निजी बांड जमा करने के बाद सोमवार को ऋचा जेल से बाहर आ सकी थी।
वहीं, ऋचा भारती ने रांची की अदालत के फैसले को मानने से इनकार कर दिया था। अदालत के इस फैसले पर ऋचा भारती ने कहा कि जो भी अदालत में कहा गया वो मौखिक था। न मैं अदालत में थी और अदालत का फैसला मुझे लिखित में भी नहीं मिला। अदालत के फैसले को मानने से इनकार करते हुए ऋचा ने कहा था कि वैसे तो में हजार कुरान की कॉपियां बांट सकती हूं लेकिन सजा के तौर पर नहीं।
ऋचा भारती ने अपनी पोस्ट पर सफाई देते हुए कहा था कि वो पोस्ट मैंने नहीं लिखी थी और उसे आपत्तिजनक कहना गलत है। मैंने तो बस उसे शेयर किया था। मैं फेसबुक के बहुत सारे ग्रुप में हूं। उन ग्रुप में जो कुछ मुझे सही लगता है मैं शेयर कर देती हूं। ऋचा ने कहा था कि मैंने भारतीय मुसलमानों के खिलाफ कुछ नहीं लिखा। मैंने तो रोहिंग्या मुस्लिमों पर पोस्ट की थी। किसी की भावना को आहत करना मेरा मकसद नहीं था।