एमएमडीआर अधिनियम के खिलाफ झारखंड में गठबंधन सरकार के प्रदर्शन और राज्य से कोयला बाहर नहीं जाने देने के ऐलान पर गोड्डा से भाजपा सांसद निशिकांत दूबे ने सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि झारखंड सरकार का कोयला रोकने या उसकी आपूर्ति बाधित करने का फैसला उसके लिए खुद के पैरों पर कुल्हाड़ी मारने जैसा साबित होगा। उन्होंने कहा कि यदि झारखंड कोयला नहीं देगा तो ओडिशा, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल से इसकी आपूर्ति की जाएगी। इससे बिजली संयंत्रों में कोयले की कमी नहीं होने दी जाएगी।
निशिकांत दूबे ने कहा कि झारखंड में कोयला खनन और उसकी आपूर्ति से राज्य को मिलने वाले राजस्व का सीधा संबंध है। यदि कोयले का उत्पादन और परिवहन प्रभावित होता है तो इसका असर राज्य की आर्थिक व्यवस्था पर पड़ेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि झारखंड में बड़े पैमाने पर कोयले की चोरी हो रही है और इसमें राज्य सरकार का संरक्षण प्राप्त है। उन्होंने यह भी दावा किया कि राज्य में कोयले की कीमत अन्य राज्यों की तुलना में अधिक है, जिसके कारण खरीदार यहां से कोयला लेने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं।
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झामुमो और कांग्रेस की ओर से राज्य से एक छटाक भी कोयला बाहर नहीं जाने देने और जरूरत पड़ने पर नाकेबंदी करने संबंधी बयान पर सांसद ने कहा कि इससे केंद्र या दूसरे राज्यों पर कोई खास प्रभाव नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा कि नाकेबंदी होने पर इसका आर्थिक नुकसान झारखंड सरकार को ही उठाना पड़ेगा। इससे राज्य की आर्थिक स्थिति प्रभावित होगी और सरकार के सामने राजस्व का संकट खड़ा हो सकता है।
इधर, निशिकांत दूबे के बयान पर झामुमो और कांग्रेस ने पलटवार किया है। झामुमो प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य और कांग्रेस प्रवक्ता राकेश सिन्हा ने निशिकांत दूबे को बड़बोला जनप्रतिनिधि बताया। दोनों नेताओं ने कहा कि समय आने पर कोयले की आवाजाही को लेकर पार्टी अपना रुख स्पष्ट करेगी। साथ ही, 2029 के लोकसभा चुनाव का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि गोड्डा की जनता निशिकांत दूबे को राजनीतिक जवाब देगी।