खूंटी के उलिहातू स्थित बिरसा मुंडा म्यूजियम में गंगा की मिट्टी से बनी 12 म्यूरल पेंटिंग्स के जरिए धरती आबा के जीवन, संघर्ष और उलगुलान की गाथा दर्शाई जाएगी। 15 नवंबर को इनका उद्घाटन होगा।
खूंटी जिले के उलिहातू स्थित म्यूजियम में धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा के जीवन और संघर्ष की कहानी को कलाकृतियों के माध्यम से उकेरा जा रहा है। यहां लगने वाली 12 म्यूरल पेंटिंग्स के जरिये लोग उनके बचपन, सामाजिक सुधार प्रयासों और अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ उलगुलान के इतिहास को करीब से समझ सकेंगे। साहिबगंज के प्रसिद्ध म्यूरल पेंटिंग कलाकार श्याम विश्वकर्मा ने गंगा की मिट्टी से इन 12 कलाकृतियों को तैयार किया है। करीब 20 लाख रुपये की लागत से तैयार हो रही इन कृतियों का औपचारिक उद्घाटन 15 नवंबर को बिरसा मुंडा की जयंती और झारखंड स्थापना दिवस के अवसर पर किया जाएगा। इन कलाकृतियों का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी को धरती आबा के विचारों, आंदोलनों और आदिवासी अस्मिता से जोड़ना है।
उलगुलान और सामाजिक अभियानों का चित्रण
गंगा की मिट्टी से निर्मित पारंपरिक कला
इन म्यूरल पेंटिंग्स की सबसे बड़ी खासियत निर्माण सामग्री और तकनीक है। कलाकार ने गंगा की मिट्टी को आग में पकाकर पारंपरिक म्यूरल तकनीक से इन कृतियों को गढ़ा है। कलाकार श्याम विश्वकर्मा अपनी चार सदस्यीय टीम के साथ बुधवार को उलिहातू के लिए रवाना हुए हैं। उनकी टीम गुरुवार से चार नवंबर तक म्यूजियम में सभी कलाकृतियों की स्थापना का काम पूरा करेगी। श्याम विश्वकर्मा की बनाई कलाकृतियां इससे पहले झारखंड मंत्रालय, राज्य सचिवालय, झारखंड उच्च न्यायालय परिसर, भारतीय रिजर्व बैंक, नई दिल्ली स्थित झारखंड भवन और विभिन्न जिलों के सरकारी कार्यालयों में भी स्थापित हो चुकी हैं।
भव्य मुख्य द्वार और आदमकद प्रतिमा