झारखंड में स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खोलने वाला एक मामला सामने आया है। गोड्डा के पोड़ैयाहाट सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से सदर अस्पताल ले जाने के दौरान एंबुलेंस में ऑक्सीजन समाप्त होने से एक नवजात की मौत हो गई। बासमुंडी गांव के निवासी इस्माइल अंसारी अपनी पत्नी मर्जीना खातून को प्रसव के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर आए थे, जहां बच्चे के जन्म के बाद गंभीर स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने उसे सदर अस्पताल गोड्डा के लिए रेफर कर दिया। परिजन शुक्रवार की सुबह लगभग 4:00 से 4:30 बजे के बीच नवजात और उसकी मां को लेकर एंबुलेंस से रवाना हुए थे।
डीजल के नाम पर वसूली और ऑक्सीजन की कमी
परिजनों ने आरोप लगाया कि पोड़ैयाहाट से निकलने से पहले एंबुलेंस चालक ने उनसे डीजल के नाम पर जबरन 500 रुपये ले लिए। स्वास्थ्य केंद्र से लगभग 1 से 1.5 किलोमीटर आगे पहुंचते ही एंबुलेंस का ऑक्सीजन सिलिंडर खत्म हो गया। चालक ने रास्ते में ही गाड़ी रोक दी और दूसरा सिलिंडर मंगवाने में 20 से 30 मिनट का समय नष्ट हो गया। सदर अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने बच्चे की जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। चिकित्सकों के अनुसार यदि बच्चे को 15 से 20 मिनट पहले अस्पताल पहुंचा दिया जाता, तो उसकी जान बचाई जा सकती थी।
अस्पताल परिसर में वाहन छोड़कर चालक हुआ फरार
घटना के बाद एंबुलेंस चालक वाहन को सदर अस्पताल परिसर में खड़ा कर मौके से फरार हो गया। नवजात की मृत्यु से उसकी मां मर्जीना खातून गहरे सदमे में चली गईं और काफी देर तक वाहन से बाहर निकलने से इन्कार करती रहीं। आपातकालीन सेवा में प्रयुक्त इस एंबुलेंस पर कोई नंबर प्लेट भी नहीं लगी थी। यह एंबुलेंस राजमहल परियोजना के सीएसआर मद से स्वास्थ्य विभाग गोड्डा को उपलब्ध कराई गई थी। बिना नंबर प्लेट के एंबुलेंस के परिचालन और उसमें ऑक्सीजन की पर्याप्त व्यवस्था न होने को लेकर स्थानीय लोगों में भारी रोष व्याप्त है।
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जांच समिति का हुआ गठन
गोड्डा के सिविल सर्जन सुभाष चन्द्र शर्मा ने इस मामले को दुखद और गंभीर बताते हुए कहा कि एंबुलेंस में ऑक्सीजन खत्म होने, अवैध वसूली और बिना नंबर प्लेट वाहन चलाने के सभी आरोपों को संज्ञान में लिया गया है। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से उच्चस्तरीय समिति गठित करने की बात कही है। सिविल सर्जन ने स्पष्ट किया कि जांच में चालक या किसी स्वास्थ्यकर्मी की लापरवाही, अवैध वसूली या आपातकालीन व्यवस्था की अनदेखी सामने आने पर दोषियों के विरुद्ध कठोर विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाएगी। स्वास्थ्य सेवाओं में इस प्रकार की लापरवाही कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।