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झारखंड: हजारीबाग में 50 डिसमिल खास महल जमीन पर विवाद, पूर्व मंत्री साव ने रिकॉर्ड और कार्रवाई पर उठाए सवाल

Wed, 23 Sep 2026 03:17 PM IST
राँची ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची

सार

साव का कहना है कि मामला हाईकोर्ट तक पहुंच चुका है और आगे की स्थिति न्यायालय के आदेश से स्पष्ट होगी। हालांकि, हाईकोर्ट में मामले की वर्तमान स्थिति या किसी अंतरिम अथवा अंतिम आदेश की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध स्रोतों से नहीं हो सकी है।
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पूर्व मंत्री योगेंद्र साव
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विस्तार
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हजारीबाग के हुरहुरू स्थित कैंटोनमेंट मौजा की करीब 50 डिसमिल खास महल जमीन को लेकर प्रशासन और पूर्व मंत्री योगेंद्र साव के बीच विवाद अब जमीन के रिकॉर्ड, लीज नवीनीकरण, पुनर्ग्रहण और अतिक्रमण हटाने की प्रशासनिक प्रक्रिया तक पहुंच गया है। 18 सितंबर को अतिक्रमण हटाने के दौरान प्रशासनिक टीम और योगेंद्र साव के बीच विवाद हुआ था। प्रशासन ने संबंधित जमीन को सरकारी खास महल भूमि बताते हुए कार्रवाई की थी।

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अब योगेंद्र साव ने कार्रवाई की प्रक्रिया और जमीन के रिकॉर्ड को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जमीन पर कोई नया निर्माण नहीं हुआ था। ऐसे में अचानक तोड़फोड़ की कार्रवाई क्यों की गई, यह स्पष्ट किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि जमीन के लीज नवीनीकरण या पुनर्ग्रहण की प्रक्रिया चल रही थी, तो उससे संबंधित अभिलेख, आदेश और पूरी प्रशासनिक प्रक्रिया सार्वजनिक की जानी चाहिए।

साव का दावा है कि संबंधित जमीन के रजिस्टर-2 में अब भी मोहम्मद एहसान का नाम दर्ज है और रिकॉर्ड में इसे सीधे तौर पर सरकारी जमीन के रूप में दर्ज नहीं किया गया है। उनका कहना है कि जमीन की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए पुराने अभिलेख, पट्टा और लीज से जुड़े दस्तावेजों की जांच जरूरी है। वहीं, प्रशासन का पक्ष इससे अलग है। 18 सितंबर को कार्रवाई के दौरान सदर अंचलाधिकारी सह खास महल पदाधिकारी आशुतोष कुमार ने संबंधित भूमि को सरकारी खास महल जमीन बताया था। प्रशासन के अनुसार अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई नियमानुसार की गई।
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योगेंद्र साव ने बताया कि पूरे मामले में सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांगी गई है। डीसी कार्यालय में दिए आवेदन में जिले में कुल खास महल भूमि का रकबा, वर्ष 2010 के बाद हुए पट्टा नवीनीकरण, पट्टों की अवधि, पुनर्ग्रहित भूमि और लंबित नवीनीकरण से जुड़े मामलों की जानकारी मांगी गई है। साव के अनुसार जमीन पर हुई तोड़फोड़ के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया भी शुरू की गई है। उन्होंने बड़ा बाजार टीओपी में अंचलाधिकारी के खिलाफ शिकायत देने तथा थाना प्रभारी, एसपी, डीसी और राज्य सरकार के संबंधित अधिकारियों को लिखित शिकायत भेजने की बात कही है।

शिकायत के साथ वीडियो फुटेज और अन्य दस्तावेज उपलब्ध कराने का भी दावा किया गया है। साव का कहना है कि मामला हाईकोर्ट तक पहुंच चुका है और आगे की स्थिति न्यायालय के आदेश से स्पष्ट होगी। हालांकि, हाईकोर्ट में मामले की वर्तमान स्थिति या किसी अंतरिम अथवा अंतिम आदेश की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध स्रोतों से नहीं हो सकी है। इसलिए इस दावे की पुष्टि न्यायालय के आधिकारिक आदेश से ही मानी जाएगी।
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इधर, जिला प्रशासन ने सितंबर में खास महल भूमि के सर्वे की समीक्षा करते हुए 25 सितंबर तक समेकित रिपोर्ट उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था। पुनर्ग्रहित खास महल भूमि पर अतिक्रमण के मामलों को चिह्नित कर नियमानुसार कार्रवाई करने को भी कहा गया था। 18 सितंबर की कार्रवाई में प्रशासन ने जेसीबी से पीसीसी सड़क और गौशाला के शेड को हटाया था। प्रशासन का कहना था कि अतिक्रमण हटाने के लिए पहले भी प्रयास किए जा चुके हैं। अब पूरे मामले में जमीन के पुराने रिकॉर्ड, लीज नवीनीकरण और पुनर्ग्रहण से जुड़े दस्तावेजों की जांच तथा आगे की प्रशासनिक और न्यायिक प्रक्रिया पर नजर है।

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