झारखंड के पलामू जिले के चैनपुर में हुए चर्चित नाबालिग हत्याकांड की गुत्थी सुलझाने के लिए पुलिस और विशेष जांच दल (एसआईटी) ने कार्रवाई तेज कर दी है। पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर पुलिस ने 14 और संदिग्धों के डीएनए सैंपल एकत्र कर फॉरेंसिक साइंस लैब (एफएसएल) भेजे हैं। पुलिस इससे पहले 19 अन्य लोगों के डीएनए सैंपल की जांच करा चुकी है। इसके अलावा, पुलिस दो मुख्य संदिग्धों का लाई डिटेक्टर टेस्ट कराने की तैयारी भी कर रही है।
वैज्ञानिक जांच और डीएनए सैंपल
सदर एसडीपीओ राजेश यादव के अनुसार पुलिस डीएनए सैंपलिंग के साथ तकनीकी अनुसंधान के विभिन्न पहलुओं पर बारीकी से काम कर रही है। नए 14 सैंपलों की वैज्ञानिक जांच के जरिये मामले से जुड़े साक्ष्यों और संदिग्धों की भूमिका को स्पष्ट करने की कोशिश की जा रही है। पुलिस दो मुख्य संदिग्धों के लाई डिटेक्टर टेस्ट के माध्यम से मामले में अतिरिक्त जानकारी जुटाने का प्रयास करेगी। हालांकि इस टेस्ट के नतीजों को अपने आप में अपराध का निर्णायक प्रमाण नहीं माना जा सकता और किसी भी संदिग्ध की भूमिका अन्य साक्ष्यों तथा कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही निर्धारित होगी।
कुएं से बरामद हुआ था शव
यह मामला 7 नवंबर, 2025 का है, जब चैनपुर क्षेत्र की एक नाबालिग अचानक लापता हो गई थी। घटना के दो दिन बाद 9 नवंबर 2025 को बालिका का शव उसके घर से कुछ ही दूरी पर स्थित एक कुएं से बरामद हुआ था। घटना के बाद पूरे इलाके में आक्रोश व्याप्त हो गया और परिजनों ने न्याय की मांग को लेकर लगातार आवाज उठाई। शुरुआती जांच के दौरान पोस्टमार्टम तथा मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने हत्या और यौन हिंसा के पहलुओं की गंभीरता से जांच की।
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परिजनों का धरना और एसआईटी का गठन
मामले में कई महीने बीत जाने के बाद भी जांच के नतीजे सामने न आने से नाराज पीड़ित परिवार ने न्याय की मांग को लेकर कई दिनों तक धरना दिया था। इस घटना को लेकर स्थानीय स्तर पर विरोध-प्रदर्शन भी हुए और यह विषय राजनीतिक चर्चा में बना रहा। परिजनों की मांग और जन-आक्रोश के बीच पुलिस ने जांच तेज करते हुए वरिष्ठ अधिकारियों को शामिल कर विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया। पुलिस अब वैज्ञानिक साक्ष्यों और तकनीकी जांच के निष्कर्षों के आधार पर मामले का खुलासा करने का प्रयास कर रही है।