एलिशा ने कहा कि नौ साल की उम्र में उसने अपने माता-पिता को खो दिया था। इसके बाद एक अनाथालय में उसे भर्ती करा दिया गया। वहां से 2015 में उसने जिले के कालामाटी स्थित कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय में दाखिला लिया।
झारखंड के माओवादी हिंसा प्रभावित खूंटी जिले के एक सुदूरवर्ती गांव की अनाथ आदिवासी छात्रा ने सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक-जेईई मेन में सफलता हासिल की है। एलिशा हस्सा (19) कभी हिंदी बोलना भी नहीं जानती थी। उसने बताया कि वह इंजीनियर बनकर गरीबी से पीड़ित बच्चों के जीवन में बदलाव लाना चाहती है।
विज्ञापन
एलिशा ने कहा कि नौ साल की उम्र में उसने अपने माता-पिता को खो दिया था। इसके बाद एक अनाथालय में उसे भर्ती करा दिया गया। वहां से 2015 में उसने जिले के कालामाटी स्थित कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय में दाखिला लिया। एलिशा ने बताया कि उसने जिला प्रशासन की ओर से चलाए जा रहे ‘सपनों की उड़ान’ कोचिंग कार्यक्रम से जुड़कर जेईई मेन की तैयारी की। उसे एसटी वर्ग में 1,788वां रैंंक मिला है। वह अब जेईई एडवांस्ड की तैयारी कर रही है।
बिरसा मुंडा की वंशज समेत नौ और सफल
एलिशा की तरह कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय की नौ और छात्राओं को जेईई मेन में सफलता मिली है। इनमें क्रांतिकारी बिरसा मुंडा की वंशज सरस्वती मुंडा भी शामिल हैं। बिरसा मुंडा ने आजादी के संघर्ष से बहुत पहले अंग्रेजों के खिलाफ युद्ध छेड़ा था। छात्राओं के उत्कृष्ट प्रदर्शन को देखते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने उन्हें हर संभव सहयोग का वादा किया है।