फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

झारखंड: कुपोषण से 52 बच्चों की मौत पर मानवाधिकार कमीशन सख्त, सरकार को भेजा नोटिस

Wed, 06 Sep 2017 11:30 AM IST
amarujala.com- Presented by: अभिषेक मिश्रा
विज्ञापन
प्रतीकात्मक चित्र
विज्ञापन
राष्ट्रीय मानवाधिकार कमीशन ने झारखंड सरकार को 52 बच्चों की मौत के मामले में नोटिस भेजा है। एक अधिकारी ने बताया कि सोमवार को कमीशन ने बीते एक महीने में कुपोषण के चलते 52 बच्चों की मौत पर राज्य सरकरा को नोटिस भेजा है। 
विज्ञापन



मीडिया में खबर आने के बाद कमीशन ने संज्ञान लिया और झारखंड के चीफ सेक्रेटरी राजबाला वर्मा को नोटिस भेजाकर 6 हफ्तों में मामले की रिपोर्ट मांगी है। अधिकारी ने बताया कि कमीशन ने बच्चों की दर्दनाक मौत और कुपोषण के इस हाल देख पर चिंता जाहिर की है। 

पढ़ें: झारखंड में नवजात बने शिकार, 30 दिनों में 52 बच्चों की मौत

साथ ही मानवाधिकार कमीशन ने केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय को भी इस मामले में कार्रवाई करने को कहा है। कमीशन ने मंत्रालय से कहा है कि वह सभी राज्यों को दिशा निर्देश जारी करे जिससे इस तरह की कोई दर्दनाक घटना भविष्य में न हो। 
विज्ञापन


गौरतलब है कि झारखंड के महात्मा गांधी हॉस्पिटल में पिछले एक महीने में 52 बच्चों की मौत हुई है। अस्पताल ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि ये सभी बच्चे कुपोषण का शिकार थे। बता दें कि इससे पहले भी एक आकंड़ा सामने आया जिसमें पिछले 117 दिनों में करीब 164 बच्चों की मौत का कारण भी कुपोषण ही था। 
विज्ञापन

झारखंड में पांच वर्ष तक के 47.8 फीसदी बच्चे कुपोषित: रिपोर्ट

कुपोषण (प्रतीकात्मक चित्र)
वहीं नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-4(एनएफएचएस-4) 2015-16 की रिपोर्ट के अनुसार झारखंड में पांच वर्ष तक के 47.8 फीसदी बच्चे कुपोषित हैं। सर्वे से यह भी पता चला है कि इनमें से करीब चार लाख बच्चे अति कुपोषित हैं। राष्ट्रीय पोषण संस्थान, हैदराबाद की रिपोर्ट में भी झारखंड में बच्चों व महिलाअों की दयनीय स्थिति की पुष्टि की गई है। 

राष्ट्रीय पोषण संस्थान ने झारखंड के पांच जिलों चतरा, धनबाद, दुमका, गिरिडीह व कोडरमा में  अध्ययन किया था। एक साल के अध्ययन के बाद जो रिपोर्ट सामने आई, उसमें यह खुलासा हुआ कि इन जिलों के 57.2 फीसदी बच्चे नाटे(छोटे कद के) ,  44.2 फीसदी कम वजन वाले तथा 16.2 फीसदी काफी कमजोर हैं।
 
गौरतलब है कि झारखंड में हर वर्ष लगभग करीब आठ लाख बच्चे जन्म लेते हैं। इनमें से 29 हजार बच्चे ऐसे होते हैं जो अपना पहला जन्म दिन भी नहीं मना पाते हैं। रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि राज्य में जन्म लेने वाले करीब आधे बच्चे कुपोषण से ग्रसित होते हैं। 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें