राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग
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झारखंड के हजारीबाग में झड़प के दौरान एक नाबालिग लड़के की हत्या के मामले में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने पुलिस पर संदेह जताया है। आयोग ने कहा कि जांच एजेंसी आरोपी को बचाने की कोशिश कर सकती है। इस बाबत एनसीपीसीआर ने डीजीपी को एक पत्र भी लिखा है, जिसमें आयोग ने आरोप लगाया कि पुलिस किशोर न्याय अधिनियम, 2015, आपराधिक प्रक्रिया संहिता और अन्य कानूनों के तहत कानून का पालन करने में विफल रही है।
एनसीपीसीआर द्वारा लिखे गए पत्र में कहा गया है कि पुलिस द्वारा दर्ज की गई काउंटर एफआईआर में लगभग 16 नाबालिग बच्चों को आरोपी के रूप में नामित किया गया है। इसमें कुछ बच्चे ऐसे भी हैं जो घटना के दिन गांव में नहीं थे। इससे संदेह होता है कि जांच एजेंसी आरोपियों को बचाने की कोशिश कर रही है। पत्र में लिखा गया है कि अधिकारी निष्पक्ष जांच करने में विफल रहे हैं और गवाहों को डराने-धमकाने के विभिन्न तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं, जो कि अधिकारियों द्वारा बनाई गई झूठी कहानी में मदद करेंगे।
एनसीपीसीआर ने गुरुवार को मामले को सीबीआई को सौंपने की सिफारिश की थी। साथ ही झारखंड के डीजीपी नीरज सिन्हा से जिला पुलिस अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने और गवाहों और उनके परिवार के सदस्यों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए कहा था।
गौरतलब है कि हजारीबाग जिले के 17 वर्षीय रूपेश कुमार पांडे की 6 फरवरी को बरही में देवी सरस्वती की मूर्ति के विसर्जन जुलूस के दौरान हुई झड़प में हत्या कर दी गई थी। जिसके परिणामस्वरूप क्षेत्र में सांप्रदायिक तनाव पैदा हो गया था। इस मामले में एनसीपीसीआर के अधिकारियों ने जांच करने और जांच की प्रगति का जायजा लेने के उद्देश्य से हजारीबाग के बरही का दौरा किया था। आयोग ने गुरुवार को अपनी निरीक्षण रिपोर्ट अन्य सिफारिशों के साथ डीजीपी को भेजी थी।