झारखंड से भाजपा के राज्यसभा सांसद और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दीपक प्रकाश ने शुक्रवार को भीड़ सिंहा (मॉब लिंचिंग) के खिलाफ विधेयक लौटाने के राज्यपाल के फैसले का स्वागत किया। प्रकाश ने कहा कि यह विधेयक गैरकानूनी तरीके से लाया गया था।
विज्ञापन
राज्यपाल रमेश बैस ने गुरुवार को भीड़ हिंसा निवारण एवं भीड़ हिंसा विधेयक 2021 के मसौदे को लौटा दिया था। इसे राज्य विधानसभा ने पिछले साल दिसंबर में पारित कर दिया था। राज्यपाल ने यह मसौदा राज्य सरकार को कुछ सुझावों के साथ लौटाया है।
समाचार एजेंसी एएनआई की एक रिपोर्ट के अनुसार दीपक प्रकाश ने कहा कि यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि झारखंड सरकार ने भीड़ हिंसा के खिलाफ एक ऐसा विधेयक राज्य विधानसभा में पारित करवाया और राज्यपाल को भेजा, जो कानूनी रूप से सही नहीं है।
विज्ञापन
'सामाजिक शांति को नुकसान पहुंचाएगा यह विधेयक'
उन्होंने आगे कहा कि इस विधेयक में सीआरपीसी (दंड प्रक्रिया संहिता)और आईपीसी (भारतीय दंड संहिता) के प्रवधानों का उल्लंघन भी किया गया है। झारखंड भाजपा अध्यक्ष प्रकाश ने कहा कि यह विधेयक राज्य में सामाजिक शांति को नुकसान पहुंचाने वाला है।
दीपक प्रकाश ने कहा, 'इस विधेयक के तहत जब दो व्यक्ति किसी अपराध में शामिल होते हैं तो इसे भीड़ हिंसा कहा जाएगा। अगर एख कारोबारी कुछ लिखता है तो उसे भी भीड़ हिंसा माना जाएगा। ऐसी स्थिति में, झारखंड सरकार इसे कैसे सही बता सकती है।'