झारखंड धीरे-धीरे उत्तर प्रदेश के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है। यूपी के बाद अब झारखंड में भी मीटबंद के खिलाफ विरोध प्रदर्शन की मांग उठी है। मामला धनबाद नगर निगम कार्यालय के बाहर का है। यहां चिकन, मटन और मछली बिक्री में लगे बूचड़खानों और खुदरा विक्रेताओं के मालिकों ने लाइसेंस जारी करने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया है। जिले के सभी हिस्सों में मौजूद चिकन, मटन और मछली की दुकान वाले में से अधिकांश पुलिस के छापे से डरते हैं।
प्रदर्शनकारियों ने कार्यालय में ज्ञापन भी सौंपा। इस बीच, लाइसेंस के लिए 100 से अधिक आवेदन भी सबमिट किए गए और आवेदकों ने कहा, जब तक डीएमसी प्राधिकरण से लाइसेंस जारी नहीं हो जाते तब तक उत्पाद बेचने की अनुमति मांगी। धनबाद मीट एसोसिएशन के अध्यक्ष दीपक लाला ने कहा कि बिना लाइसेंस वाले बूचड़खानों और मांस विक्रेताओं के खिलाफ सरकार की कार्रवाई के बाद जिले में हजारों लोगों ने अपनी आजीविका खो दी है।
उन्होंने कहा कि अधिकारियों को हमारे व्यवसाय को बंद किए बिना लाइसेंस तक कुछ समय देना चाहिए। डीएमसी के तहत कई बूचड़खानों को भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) के साथ पंजीकृत किया गया है, लेकिन उनके पास नगर निगम से कोई आपत्ति प्रमाण पत्र नहीं है। सिविल सर्जन चंद्रमबिका श्रीवास्तव ने कहा कि एफएसएसएआई पंजीकरण उस क्षेत्र में व्यवसाय चलाने के लिए पर्याप्त है जो डीएमसी के तहत नहीं आते हैं। लेकिन डीएमसी अधिकार क्षेत्र के तहत आने वाली सभी ऐसी दुकानों के लिए आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि सभी ब्लॉकों में खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने बड़ी संख्या में आवेदन प्राप्त किए हैं। और जल्द ही पंजीकरण प्रमाण पत्र वितरित करने के लिए काम कर रहे हैं। डीएमसी आयुक्त मनोज कुमार ने कहा कि विभाग को आवेदन प्राप्त करने के 24 घंटों के भीतर एनओसी जारी करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि यदि जरुरी हुआ तो आवेदनों पर कार्रवाई करने के लिए अतिरिक्त तैनाती की जाएगी।