सुरक्षा बल कई सालों से बूढ़ा पहाड़ इलाके पर नियंत्रण पाने की कोशिश कर रहे थे। लेकिन ऑपरेशन के दौरान उन्हें कई नुकसान उठाना पड़ा। माओवादियों ने पहाड़ी की ओर जाने वाली सभी सड़कों पर आईईडी लगाए हुए थे।
बीते तीन दशक से माओवादियों का गढ़ रहा बूढ़ा पहाड़ अब माओवादियों के कब्जे से मुक्त करा लिया गया है। झारखंड पुलिस ने यह दावा किया। बूढ़ा पहाड़ झारखंड और छत्तीसगढ़ की सीमा पर स्थित है।
विज्ञापन
पुलिस की ओर से जारी एक बयान के मुताबिक, पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) नीरज सिन्हा अपनी टीम के साथ रविवार को उस पहाड़ी पर पहुंचे, जो शीर्ष माओवादी नेताओं का कई सालों से सुरक्षित ठिकाना बन गया था।
बयान में आगे कहा कि सुरक्षा बल कई सालों से इस इलाके पर नियंत्रण पाने की कोशिश कर रहे थे। लेकिन ऑपरेशन के दौरान उन्हें कई नुकसान उठाना पड़ा। माओवादियों ने पहाड़ी की ओर जाने वाली सभी सड़कों पर आईईडी लगाए हुए थे।
विज्ञापन
इसमें आगे कहा गया है कि सुरक्षा बलों के द्वारा बीते एक साल से चलाया जा रहा ऑपरेशन ऑक्टोपस अभियान आखिरकार प्रभावी साबित हुआ और पहाड़ी अब माओवादियों से मुक्त हो गई है।
पुलिस ने बताया कि ऑपरेशन ऑक्टोपस के तहत इसी महीने 4-5 सितंबर को माओवादियों के कई बंकरों और बारूदी सुरंगों पर कब्जा किया गया था और गोलियों समेत भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री जब्त की गई थी।
डीजीपी सिन्हा ने रविवार को ग्रामीणों से बातचीत की। उन्होंने ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि वे अब माओवादियों के डर से मुक्त हैं और उन्हें पूरी सुरक्षा मुहैया कराई जाएगी। डीजीपी ने ग्रामीणों के बीच दैनिक जरूरत की सामग्री का भी वितरण किया।
बयान में कहा गया है कि पहाड़ी पर नियंत्रण पाने के बाद अब यहां सुरक्षा बलों के शिविर स्थापित किए जाएंगे। इस इलाके के ग्रामीणों के लिए अस्पताल, स्कूल, सड़क व अन्य मूलभूत सुविधाओं का निर्माण भी शुरू किया जाएगा।