झारखंड में पिछले कुछ सालों से हाथियों और मनुष्यों के बीच टकराव हो रहे हैं जिसकी वजह से पिछले साल 56 लोगों और 13 हाथियों की जान चली गई थी। वहीं पिछले पांच सालों में 277 लोगों की मौत और 40 हाथी मारे गए हैं। इसी वजह से झारखंड वन विभाग ने रोजाना एक बुलेटिन का प्रसारण करना शुरू कर दिया है। जिसकी वजह से इस तरह के टकराव को रोका जा सके। रेडियो पर तीन मिनट के बुलेटिन के जरिए लोगों को चेतावनी और सूचना दी जाएगी कि किस इलाकों में हाथी मौजूद हैं ताकि लोग वहां जाने से बचें।
इस खास बुलेटिन का नाम- 'हमार हाथी, हमार साथी' है। शाम को साढ़े चार बजे इस बुलेटिन का प्रसारण होता है। रेडियो जॉकी लोगों को सूचना देता है कि किन स्थानों पर हाथियों के झुंड को देखा गया है और वे किस दिशा की ओर जा रहे हैं। जॉकी लोगों को सलाह देता है कि वह सावधान रहें। वन के प्रमुख संरक्षक एलआर सिंह ने कहा- हमने निजी
एफएम चैनल के साथ साझेदारी की है जिससे कि हाथियों की हलचल के बारे में और जीवन और संपत्ति के नुकसान को कम करने के लिए आवश्यक रोकथाम के लिए जागरुकता फैलाई जा सके। उन्होंने बताया कि बुलेटिन का प्रसारण सुबह 8.30 बजे और शाम को 4.30 बजे किया जाएगा।
छत्तीसगढ़ और ओडिशा के अलावा झारखंड देश में रहने वाले हाथियों की 10 प्रतिशत जनसंख्या का घर है और यहां हाथियों के जंगली झुंड या आवारा बैलों के साथ होने वाले मानव टकराव की वजह से लगभग 65 प्रतिशत लोग मारे जाते हैं। सिंह ने कहा- समय पर हाथियों की हलचल के बारे में सूचना देने से टकराव को रोका जा सकता है। यहां तक कि हमारे पास वाट्सऐप ग्रुप के अलावा हाथियों को ट्रैक करने के लिए सिस्टम मौजूद है मगर यह सूचना सूदूर गांवों तक नहीं पहुंच पाती है। गांवावलों को सूचना देने के लिए बुलेटिन को शुरू किया गया है।