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Paint politics in Jharkhand : झारखंड में हरे व सफेद रंग से पुतेंगे सरकारी स्कूल, भाजपा ने बताया सियासी मकसद

Sat, 21 May 2022 01:11 PM IST
सुरेंद्र जोशी पीटीआई, रांची

सार

झारखंड मुक्ति मोर्चा नीत सरकार का कहना है कि सरकारी स्कूलों की इमारतों का रंग विशेषज्ञों की सिफारिशों के आधार पर तय किया गया है। हरा रंग आंखों को सुकूनदायक है तो सफेद स्वच्छता का प्रतीक है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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विस्तार
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झारखंड में सरकारी स्कूल भवनों के रंग को लेकर सियासत शुरू हो गई है। राज्य के 35 हजार से ज्यादा सरकारी स्कूलों की पुताई हरे व सफेद रंगों से की जाएगी। ये रंग सत्तारूढ़ झामुमो पार्टी के झंडे से जुड़े हैं। इसे लेकर विपक्षी भाजपा ने झामुमो सरकार पर निशाना साधते हुए इसे सियासी कदम बताया है। वहीं, राज्य सरकार ने बचाव में अपनी दलीलें दी हैं। 

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झारखंड मुक्ति मोर्चा नीत सरकार का कहना है कि सरकारी स्कूलों की इमारतों का रंग विशेषज्ञों की सिफारिशों के आधार पर तय किया गया है। हरा रंग आंखों को सुकूनदायक है तो सफेद स्वच्छता का प्रतीक है। वहीं, भाजपा की राय सत्तारूढ़ दल से उलट है। भाजपा ने आरोप लगाया है कि इन रंगों का चयन राजनीतिक संदेश देने के लिए किया गया है। अभी राज्य के सरकारी स्कूलों का रंग गुलाबी तो शौचालयों का नीला है। 

दरअसल, झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद (JEPC) ने राज्य के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों (DEOs) को आदेश देकर स्कूल भवनों की दीवारों को हंस, खरगोश या नारियल जैसे सफेद रंग में रंगा जाए, जबकि दीवारों के किनारे, दरवाजे और खिड़कियां, और शौचालय भी गहरे हरे रंग में रंगे जाएं।
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शिक्षा मंत्री ने कही वैज्ञानिक बात
झारखंड के शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो ने पीटीआई को बताया कि स्कूलों को नया रूप दिया जाएगा। स्कूल भवनों को हरे व सफेद रंगों से पोता जाएगा। हमने विशेषज्ञों की राय के अनुसार रंग चुने हैं। हरा रंग चिकित्सकीय दृष्टि से भी आंखों के लिए सुकूनदायक माना गया है तो सफेद रंग स्वच्छता व ताजगी का प्रतीक है।

झामुमो के झंडे के प्रतीक हैं रंग : भाजपा
उधर, भाजपा ने आरोप लगाया कि यह कदम राजनीति से प्रेरित है। रंगों का चयन झारखंड मुक्ति मोर्चे के झंडे के अनुसार किया गया है। झामुमो का झंडा हरे रंग की पृष्ठभूमि पर सफेद रंग के धनुष और तीर से बना है। भाजपा प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने  कहा कि सरकार का रंगों का चयन एक राजनीतिक संदेश भेजने का तरीका है। राज्य में कई स्कूल बिना प्रधानाध्यापक के चल रहे हैं और शिक्षकों की कमी है। सरकार को पहले शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार और स्कूलों के बुनियादी ढांचे के विकास पर ध्यान देना चाहिए। 

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2002-03 में तत्कालीन भाजपा सरकार ने झारखंड के स्कूल भवनों का रंग पीले से गुलाबी में बदल दिया था। इसके बाद 2014 में जब झामुमो सत्ता में था तब गुलाबी रंग किया गया था और दरवाजे व खिड़कियां सुनहरे रंग की गईं थीं। 

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