झारखंड में एक चौकानें वाला मामला सामने आया है। यहां पर घटवार समाज के लोगों को आजादी के सात दशक बाद भी नहीं मालूम चला कि वह जाति की किस श्रेणी के तहत आते हैं। बता दें कि साल 1952 तक यह समाज अनुसूचित जनजाति की श्रेणी में शामिल था, तब इस समाज के लोगों को नौकरी और सरकारी सुविधायें अनुसूचित जनजातियों की तरह ही मिलती थी।
उन्हीं दिनों एक विभागीय अधिकारी की लापरवाही की वजह से यह समाज जातियों की श्रेणी से अलग हो गया था, तब से लेकर आज तक नहीं पता कि इस समाज के लोग किस श्रेणी से आते हैं। इस समाज की पूरे राज्य में 28 लाख की कुल आबादी है।
अधिकारी की इस गलती को लेकर इस समाज के लोगों ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना दिया है। इसके अलावा गृहमंत्री और पीएमओ को पत्र लिखा है। जिसका नतीजा यह हुआ कि केंद्र ने राज्य सरकार से इस मामले में रिपोर्ट मांगी है, लेकिन रिपोर्ट अभी तक शोध संस्थान की जांच का इंतजार कर रही है।