देश में कोरोना वायरस के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। वहीं झारखंड में कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए सरकार पिछले साल तैयार किए गए फ्रेमवर्क को फिर से लागू करने जा रही है। पिछले साल जब राज्य में कोरोना चरम पर था, तब इस फ्रेमवर्क को लागू किया गया था।
अब राज्य में एक बार फिर कोरोना ने पैर पसारने शुरू कर दिए हैं। ऐसे में स्वास्थ्य सचिव केके सोन ने सभी उपायुक्तों को उस फ्रेमवर्क को फिर से लागू करने आदेश दे दिए हैं। इस फ्रेमवर्क के तहत टीमों का गठन किया गया है, जो इंसीडेंट कमांडर और संबंधित पदाधिकारियों के माध्यम से संक्रमित के संपर्क में आने वाले लोगों की जल्द पहचान करेगी, जांच करेगी और इलाज के लिए निर्धारित कार्रवाई करेगी।
इस फ्रेमवर्क के तहत शहरी क्षेत्रों को कोविड-19 के लिए कलस्टर के तौर पर वर्गीकृत किया जाएगा। एक कलस्टर में न्यूनतम एक और अधिकतम तीन वार्ड होंगे। हर जिले में एक-एक डेडिकेटेड सिंगल रूम बनाए जाएंगे। हर कलस्टर में पॉजिटिव केस मैनेजमेंट टीम और कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग एंड मॉनिटरिंग टीम गठित की जाएगी।
बता दें कि पॉजिटिव केस मैनेजमेंट टीम में इंसीडेंट कमांडर, स्वास्थ्य कर्मी या आईडीएसपी के प्रतिनिधि, संबंधित थाने के प्रतिनिधि और जिला प्रशासन की ओर से मनोनीत एक व्यक्ति काम करेंगे। इसके अलावा कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग एंड मॉनिटरिंग टीम में इंसीडेंट कमांडर द्वारा मनोनीत प्रतिनिधि, संबंधित थाने का एएसआई या एसआई, अर्बन हेल्थ मैनेजर या सीएचओ, वार्ड पार्षद, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहिया, कम्यूनिटी लीडर्स और सिविल सोसाइटी के प्रतिनिधि काम करेंगे।
इस फ्रेमवर्क में पूरी योजना तैयार की गई है कि कैसे टेस्टिंग लैब से सूचना किस तरह जिला आईडीएसपी और राज्य आईडीएसपी को जाएगी और इसके माध्यम से सूचना जिला कंट्रोल रूम के पास जाएगी। पॉजिटिव केस मैनेजमेंट टीम यह सुनिश्चित करेगी कि संक्रमित को किस स्तर की फैसिलिटी में भर्ती करना है। वहीं कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग एंड मॉनिटरिंग टीम मरीज के संपर्क में आने वाले लोगों की 24 घंटे या अधिकतम 48 घंटे के भीतर पहचान करेगी।