झारखंड हाईकोर्ट ने मंगलवार को अवैध खनन से जुड़े धनशोधन के एक मामले में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के पूर्व राजनीतिक प्रतिनिधि पंकज मिश्रा की जमानत याचिका खारिज कर दी। मिश्रा को पिछले साल जुलाई में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गिरफ्तार किया था।
न्यायमूर्ति गौतम कुमार चौधरी ने मामले में दलीलें सुनने के बाद मिश्रा की जमानत अर्जी खारिज कर दी। ईडी ने पिछले साल 16 सितंबर को मिश्रा और उनके दो सहयोगियों- बच्चू यादव और प्रेम प्रकाश के खिलाफ रांची में विशेष धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) अदालत के समक्ष आरोपपत्र दायर किया था।
ईडी ने पहले एक बयान में आरोप लगाया था कि पीएमएलए की जांच से पता चला है कि पंकज मिश्रा मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के प्रतिनिधि होने के नाते अवैध खनन व्यवसायों के साथ -साथ साहिबगंज और उसके आस -पास के क्षेत्रों में अपने सहयोगियों के जरिये अंतर्देशीय नौका सेवाओं को नियंत्रित करता है। बयान में दावा किया गया था कि पंकज साहिबगंज के विभिन्न खनन साइटों में स्टोन चिप्स और बोल्डर के खनन के साथ-साथ कई क्रशर मशीनों की स्थापना और संचालन पर नियंत्रण रखता है।
ईडी ने पिछले साल मार्च में मिश्रा के खिलाफ पीएमएलए के तहत एक मामला दायर किया था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि मिश्रा ने अवैध रूप से अपने पक्ष में बड़ी संपत्ति हड़प ली या जमा कर ली है। एजेंसी ने यह भी दावा किया था कि उसने राज्य में अवैध खनन से संबंधित 1,000 करोड़ रुपये से अधिक के अपराधों की पहचान की है।
ईडी ने साहिबगंज जिले के बरहरवा पुलिस स्टेशन में मिश्रा के खिलाफ दर्ज राज्य पुलिस की प्राथमिकी पर संज्ञान लिया था। इसके साथ ही कुछ अन्य पुलिस शिकायतें भी शामिल थीं, जो शस्त्र अधिनियम और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के विभिन्न धाराओं के तहत अवैध खनन व्यापार मामलों में दर्ज की गईं थीं। ईडी की जांच तब शुरू हुई थी जब एजेंसी ने राज्य में अवैध खनन और जबरन वसूली के कथित मामलों से जुड़े मामले में झारखंड के साहिबगंज, बरहेट, राजमहल, मिर्जा चौकी और बरहरवा में 19 स्थानों पर आठ जुलाई को मिश्रा और उसके कथित सहयोगियों के घरों पर छापा मारा। ईडी ने मिश्रा और अन्य के खिलाफ मार्च में धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) का मामला दर्ज करने के बाद छापेमारी शुरू की थी।