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झारखंड में डीजीपी नियुक्ति पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: तदाशा मिश्रा की कुर्सी पर भी पड़ सकता है असर; मांगा जवाब

Thu, 08 Oct 2026 05:32 PM IST
तरुणेंद्र कुमार चतुर्वेदी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची

सार

सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड में पुलिस महानिदेशक की नियुक्ति से जुड़े राज्य सरकार के नियमों को प्रथम दृष्टया अपने पूर्व निर्देशों के विपरीत माना है। अदालत ने वर्तमान डीजीपी तदाशा मिश्रा को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है। नियुक्ति नियम रद्द होने की स्थिति में उनके पद पर भी असर पड़ सकता है।
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड में पुलिस महानिदेशक की नियुक्ति से संबंधित राज्य सरकार के नियमों को प्रथम दृष्टया अपने पूर्व के निर्देशों और ऐतिहासिक फैसलों के विपरीत माना है। अदालत ने इस मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए राज्य की वर्तमान पुलिस महानिदेशक तदाशा मिश्रा को अपना पक्ष रखने के लिए जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
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शीर्ष अदालत ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट तौर पर कहा कि यदि  नियुक्ति नियमों को अवैध पाकर रद्द किया जाता है, तो इसका सीधा प्रभाव वर्तमान पुलिस महानिदेशक के पद और उनकी नियुक्ति पर भी पड़ेगा। इसी स्थिति को ध्यान में रखते हुए अदालत ने उन्हें अपना रुख स्पष्ट करने और सफाई पेश करने का अवसर दिया है।

तीन सदस्यीय पीठ ने की मामले की सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ ने इस महत्वपूर्ण मामले की विस्तृत सुनवाई की। इस विशेष पीठ में प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची तथा न्यायमूर्ति वी. मोहना शामिल रहे। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने पक्ष प्रस्तुत किया, जबकि राज्य सरकार का प्रतिनिधित्व वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने किया।
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अदालत में झारखंड सरकार द्वारा पुलिस प्रमुख की नियुक्ति प्रक्रिया के संबंध में बनाए गए नियमों की कानूनी वैधता को चुनौती दी गई है। केंद्र सरकार ने राज्य सरकार द्वारा 8 जनवरी, 2025 को अधिसूचित ‘पुलिस महानिदेशक एवं महानिरीक्षक, झारखंड (पुलिस बल के प्रमुख) के चयन एवं नियुक्ति नियम, 2025’ को चुनौती दी है। केंद्र का कहना है कि नियमों में तय की गई व्यवस्था सुप्रीम कोर्ट द्वारा पूर्व में तय किए गए मानकों के अनुरूप नहीं है।

प्रकाश सिंह फैसले के उल्लंघन का आरोप
मामले की बहस के दौरान सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ को अवगत कराया कि केंद्र सरकार ने झारखंड सरकार को पूर्व में कई बार यह स्पष्ट किया है कि उसके बनाए नियम सुप्रीम कोर्ट के प्रसिद्ध प्रकाश सिंह मामले में दिए गए निर्देशों के सर्वथा विपरीत हैं। उन्होंने कहा कि शीर्ष अदालत के सिद्धांतों का उल्लंघन करने वाले ऐसे नियमों को किसी भी स्थिति में बरकरार नहीं रखा जा सकता।

केंद्र सरकार ने अदालत के समक्ष यह तथ्य भी रखा कि पुलिस महानिदेशक की नियुक्ति से संबंधित सुप्रीम कोर्ट के निर्देश देश के सभी राज्यों पर समान रूप से लागू होते हैं। उन्होंने अदालत से आग्रह किया कि इस मामले को किसी एक राज्य अथवा राजनीतिक दल तक सीमित न रखा जाए। यदि किसी अन्य राज्य ने भी इसी प्रकार के नियम बनाए हैं, तो उन्हें भी निरस्त किया जाना चाहिए।

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राज्य सरकार करेगी नियमों पर पुनर्विचार
झारखंड सरकार की ओर से उपस्थित वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने पीठ को जानकारी दी कि राज्य सरकार पुलिस महानिदेशक की नियुक्ति से जुड़े इन नियमों पर पुनर्विचार करेगी। राज्य सरकार द्वारा पुनर्विचार करने का आश्वासन दिए जाने के उपरांत ही अदालत ने वर्तमान पुलिस महानिदेशक तदाशा मिश्रा को अपना पक्ष रखने का समय प्रदान किया।
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अदालत ने दोहराया कि यह मामला केवल नियमों की तकनीकी शब्दावली तक सीमित नहीं है, क्योंकि यदि नियमों को रद्द किया जाता है, तो वर्तमान पुलिस महानिदेशक की पदस्थापना भी सीधे तौर पर प्रभावित होगी। इसी वजह से संबंधित पक्ष को अपना मत रखने का अवसर दिया जाना आवश्यक है। अब राज्य सरकार और पुलिस महानिदेशक की ओर से दिए जाने वाले औपचारिक जवाबों के पश्चात ही सर्वोच्च अदालत इस मामले में आगे की सुनवाई करेगी।
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