झारखंड में सरकार गिराने की साजिश रचने का आरोप लगाए जाने के बाद से भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस पर हमला बोला है। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा है कि कांग्रेस ने जो मेरे ऊपर FIR की है वह फर्जी है। उन्होंने कहा कि तथाकथित FIR ऐसी लग रही है जैसे कांग्रेस ओत्तावियो क्वात्रोच्चि को बोफोर्स के खिलाफ मामला दर्ज करने के लिए कह रही है। दरअसल, असम के मंत्री पी हजारिका ने एफआईआर कराने वाले झारखंड से कांग्रेस विधायक कुमार जयमंगल की हिमंत बिस्वा सरमा के साथ तस्वीर साझा करते हुए बताया है कि उनके बीच क्यों और कहां मुलाकात हुई थी। इसके बाद इसी ट्वीट को रीट्वीट करते हुए असम के मुख्यमंत्री ने लिखा, ''झारखंड में फर्जी FIR की गई। तथाकथित FIR ऐसी लग रही है जैसे कांग्रेस ओत्तावियो क्वात्रोच्चि को बोफोर्स के खिलाफ मामला दर्ज करने के लिए कह रही है।''
क्या है मामला
दरअसल, झारखंड कांग्रेस ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा पर आरोप लगाते हुए कहा कि वे झारखंड में झामुमो-कांग्रेस गठबंधन सरकार को गिराने का प्रयास कर रहे थे। झारखंड कांग्रेस विधायक कुमार जयमंगल ने एक पत्र लिखकर आरोप लगाया था कि पश्चिम बंगाल में गिरफ्तार किए गए उनके तीन सहयोगियों ने हाल ही में उन्हें गुवाहाटी में असम के मुख्यमंत्री से मिलने के लिए कहा था और झामुमो-कांग्रेस सरकार को गिराने के लिए उन्हें मंत्री पद और भारी नकदी दी जाएगी।
कांग्रेस विधायक के आरोप पर असम के मंत्री ने किया पलटवार
झारखंड कांग्रेस के विधायक जयमंगल के आरोपों का जवाब देने के लिए असम के मंत्री पी हजारिका ने एक तस्वीर साझा करते हुए बताया कि सीएम हिमंत बिस्वा सरमा और जयमंगल के बीच क्यों और कहां मुलाकात हुई थी। मंत्री पी हजारिका ने लिखा कि झारखंड कांग्रेस विधायक कुमार जयमंगल ने फर्जी आरोप लगाया कि तीन गिरफ्तार विधायकों ने उन्हें असम के CM से मिलने का लालच दिया। हजारिका ने कहा कि सीएम ने उन्हें ट्रेड यूनियन से संबंधित मामले में मदद करने के लिए 26 जुलाई को केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी के आवास पर मुलाकात करने ले गए। तस्वीर में देखा जा सकता है कि जयमंगल हेमंत बिस्वा सरमा और केंद्रीय मंत्रा प्रह्लाद जोशी एक साथ बैठकर बातचीत करते नजर आ रहे हैं।
कांग्रेस नेता कुमार जयमंगल स्वयं गए थे असम के सीएम से मिलने: सुशील सिंह
भाजपा विधायक सुशील सिंह ने कहा कि झारखंड से कांग्रेस के विधायक कुमार जयमंगल असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा के पास खुद गए थे मिलने।
कौन था क्वात्रोच्चि
इतालवी कारोबारी ओतावियो क्वात्रोच्चि बोफोर्स घोटाले का अहम किरदार माना जाता रहा है। उसकी मौत के साथ ही इस घोटाले से जुड़े कई राज दफन हो गए। क्वात्रोच्चि पर बोफोर्स तोप सौदे में दलाली लेने का आरोप था। क्वात्रोच्चि को भारतीय राजनीति के सबसे ताकतवर गांधी परिवार का करीबी माना जाता रहा है। 1987 में बोफोर्स घोटाले के सामने आने पर क्वात्रोच्चि का नाम प्रमुख आरोपी के रूप में सामने आया था।
क्या था बोफोर्स घोटाला
1986 में स्विस आर्म्स निर्माता कंपनी बोफोर्स ने हाविट्जर तोपों की सप्लाई के लिए भारत के साथ 1600 करोड़ रुपये का सौदा किया था। तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी और उनकी पत्नी सोनिया गांधी के करीबी दोस्त माने जाने वाले क्वात्रोच्चि पर इस सौदे में बिचौलिये की भूमिका निभाने का आरोप लगा था। इतालवी बिजनेसमैन पर आरोप था कि इस सौदे के बदले उसे दलाली की रकम का बड़ा हिस्सा मिला।
क्वात्रोच्चि 1993 में फरार
गिरफ्तारी से बचने के लिए क्वात्रोच्चि 1993 में भारत से फरार हो गया था। मार्च 2011 में दिल्ली की एक अदालत ने सीबीआई को उसके खिलाफ मामले को बंद की अनुमति दे दी थी क्योंकि जांच एजेंसी ने कोर्ट को बताया था कि वह क्वात्रोच्चि के भारत प्रत्यर्पण में असमर्थ है।