पवन गुप्ता की तबीयत बिगड़ने पर उनकी बेटी उन्हें हजारीबाग से रांची लाए थी। वह अस्पताल दर अस्पताल भटकते रही, लेकिन कहीं बेड नहीं मिला। आखिर में वह अपने पिता को लेकर सदर अस्पताल पहुंची। यहां अंदर मंत्री निरीक्षण कर रहे थे, बाहर वे तड़प रहे थे। आखिर में पवन गुप्ता ने अस्पताल के बाहर ही दम तोड़ दिया।
भाजपा बोली- सरकार की लापरवाही से बेटी ने खोया अपना पिता
राज्य में भारतीय जनता पार्टी ने इस घटना पर कहा कि सरकार की लापरवाही से बेटी ने अपने पिता को खो दिया। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश ने कहा कि सरकार की लापरवाही के कारण इस बेटी ने अपने पिता को खो दिया है। उन्होंने पूछा है कि आखिर कब अपनी जिम्मेदारियों को समझेंगे मुख्यमंत्री जी?
सरकार ने दिए जांच के आदेश
स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता ने घटना की जांच कर 48 घंटे के अंदर जांच रिपोर्ट सिविल सर्जन रांची से मांगी हैं। उन्होंने पूछा है कि किन परिस्थितियों में किसकी लापरवाही के कारण मरीज की मौत हुई है। मंत्री ने कहा कि कोरोना काल में झारखंड की जनता की सेहत की उन्हें चिंता है। इसलिए अपनी सेहत की परवाह किए बिना कोरोना मरीजों से मिलने कोरोना वार्ड में गए थे।