झारखंड में संताल परगना विकास के मामले में भले ही आगे न हो लेकिन राजनीतिक भ्रष्टाचार के मामलों में सबसे आगे दिख रहा है। संताल परगना के 18 में से आठ विधायक भ्रष्टाचार या आपराधिक मामलों में फंसे हैं। इनमें से सात पर सीबीआई और एक विधायक पर निगरानी का फंदा है। इन आरोपी विधायकों में से कुछ काफी पुराने हैं और पार्टी में दबदबा रखते हैं।
इन विधायकों पर सरकार बचाने के लिये रिश्वत, वोट के बदले नोट, आय से अधिक संपत्ति और बीच घोटाले जैसे गंभीर आरोप लगे हैं। विधायक नलिन सोरेन को छोड़कर अन्य सातों विधायकों के मामले की जांच सीबीआई कर रही है। इनमें से जरमुंडी विधायक हरिनारायण राय तो दो साल से अधिक जेल में रहे चुके हैं। इन आठ विधायकों में से झामुमो के तीन, राजद के दो, एक-एक कांग्रेस व भाजपा और एक निर्दलीय विधायक हैं।
जिन विधायकों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं उनमें झामुमो विधायक साइमन मरांडी (लिट्टीपाड़ा) पर नरसिंह राव की सरकार को बचाने के लिए रिश्वत लेने का आरोप व राज्यसभा चुनाव 2010 में पैसे लेकर वोट देने का आरोप। दोनों मामलों की जांच सीबीआई कर रही है। वहीं झामुमो विधायक सीता सोरेन (जामा) पर 2012 के चुनाव में रिश्वत लेकर वोट देने का आरोप और अपने पीए के अपहरण का आरोप है। झामुमो विधायक नलिन सोरेन (शिकारीपाड़ा) झारखंड में व्यापक पैमाने पर बीज घोटाले में आरोपी हैं।
इसी तरह निर्दलीय विधायक हरिनारायण राय (जरमुंडी) आय से अधिक संपत्ति के मामले में आरोपित चल रहे हैं और बेल पर हैं। भाजपा के अरुण मंडल (राजमहल), राजद के संजय प्रसाद यादव (गोड्डा) व सुरेश पासवान (देवघर) 2012 के राज्यसभा चुनाव में वोट के बदले नोट लेने के आरोप में घिरे हैं। मामला सीबीआई के पास है। कांग्रेस के राजेश रंजन (महगामा) 2010 में रिश्वत लेकर राज्य सभा चुनाव में वोट देने का आरोप है।
नलिन सोरेन की गिरफ्तारी के लिए भी निगरानी ने छापेमारी की, लेकिन वे फरार हो गये हैं। इसी तरह सीता सोरेन की गिरफ्तारी का आदेश भी दे दिया गया है। किसी भी दिन ये पकड़ में आ सकते हैं। जबकि 2010 व 2012 के राज्यसभा चुनाव में वोट के बदले नोट लेने के मामले में सीबीआई जांच चल रही है।